मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज बस्ती जिले में मुंडेरवा चीनी मिल का लोकार्पण करेंगे। 21 साल से बंद पड़ी इस चीनी मिल की जगह 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन पेराई क्षमता का नई यूनिट और 27 मेगावाट बिजली उत्पादन प्लांट स्थापित किया गया है।
इस चीनी मिल को चलवाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे तीन किसान पुलिस की गोली लगने से मारे गए थे। चीनी मिल का लोकार्पण उन किसानों की शहादत को सलाम होगा।
राज्य चीनी निगम की मुंडेरवा इकाई 1998 में बंद कर दी गई थी। मिल की चिमनियों में धुआं बंद होने के साथ ही हजारों किसानों व व्यापारियों की खुशियां छिन गई थी। इसे चलवाने के लिए किसानों ने लंबा आंदोलन किया।
दिसंबर 2002 में आंदोलनकारी किसानों पर पुलिस ने गोली चलाई थी। इसमें तीन किसान मारे गए थे। प्रदेश में भाजपा सरकार बनते ही मुख्यमंत्री योगी आादित्यनाथ ने पूर्वांचल की दो बंद पड़ी चीनी मिलों, मुंडेरवा (बस्ती) व पिपराइच (गोरखपुर) को चलाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी थी। मुंडेरवा चीनी मिल का शिलान्यास मार्च 2018 में हुआ।
आज मुख्यमंत्री मिल का लोकार्पण करने के साथ ही इसके पहले पेराई सत्र का शुभारंभ करेंगे। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री सुरेश राणा ने बुधवार को नवनिर्मित चीनी मिल परिसर का भ्रमण किया और मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारियों को अंतिम रूप दिया।
सुरेश राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने और पुरानी मिलों की क्षमता बढ़ाने के कार्य को प्राथमिकता पर शुरू किया गया।
मुंडेरवा चीनी मिल मिल रिकॉर्ड 12 महीने में बन कर तैयार हुई है। इसके सभी ट्रायल हो चुके हैं। बृहस्पतिवार को उद्घाटन के साथ ही मिल का पेराई सीजन प्रारंभ हो जाएगा। तीन दिन पहले ही सीएम योगी ने पिपराइच चीनी मिल का लोकार्पण किया था।
पूर्वांचल को चीनी का कटोरा बनाने की तैयारी
एक जमाने में पूर्वांचल को चीनी का कटोरा (शुगर बाउल) कहा जाता था। ब्रिटिश काल से यहां गन्ने की खेती हो रही थी। शुगर मिलों की स्थापना भी अंग्रेजी राज में ही प्रारंभ हो गई थी। कई कारणों से चीनी मिलें बंद होने के साथ ही पूर्वांचल में गन्ने की मिठास, किसानों की खुशहाली पर ग्रहण लगने लगा। पिपराइच व मुंडेरवा चीनी मिल प्रारंभ होने के बाद पूर्वांचल में एक बार फिर गन्ना किसान व शुगर इंडस्ट्री के अच्छे दिन आ सकते हैं।
वाल्टरगंज व गडौरा के किसानों की उम्मीद बढ़ी
पूर्वांचल की दो निजी चीनी मिलें पिछले साल बंद हुई हैं। इनमें बस्ती की वाल्टरगंज बजाज ग्रुप और महाराजगंज की गडौरा मिल जवाहर जायसवाल की है। ये दोनों चीनी मिलें 50-50 हजार कुंतल प्रतिदिन पेराई क्षमता की हैं और अच्छी हालत में बंद हुई थीं।
इन चीनी मिलों के बंद होने से किसानों व व्यापारियों की परेशानियां बढ़ी हैं। पिपराइच व मुंडेरवा मिल चलने केबाद इन क्षेत्रों के किसानों को उम्मीद बंधी है कि सरकार के दखल से वाल्टरगंज व गडौरा चीनी मिलों का संचालन प्रारंभ हो सकेगा।
पेराई सत्र 2015-16 में खलीलाबाद चीनी मिल भी बंद हो गई थी। इस मिल का प्लांट ही उखाड़ लिया है। चार साल पहले बजाज ग्रुप ने बस्ती मिल भी बंद कर दी थी।