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नई सोसाइटी भी आएंगी हाउस टैक्स के दायरे में

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शहरों में तेजी से बसने वाली नई सोसायटियां भी अब हाउस टैक्स के दायरे में होंगी। निकाय यदि इन सोसायटियों में विकास कार्य कराते हैं, तो यहां भी हाउस टैक्स की वसूली की जाएगी। हाउस टैक्स का निर्धारण बिजली का कनेक्शन लेने वाले दिन से किया जाएगा।
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नगर विकास विभाग इस संबंध में निकाय अधिकारियों को जल्द ही निर्देश भेजने की तैयारी कर रहा है। यह कवायद नगर निकायों को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने और हाउस टैक्स वसूली का दायरा बढ़ाने के लिए हो रही है। साथ ही नए शुल्कों के भी निर्धारण की तैयारी है।

सूबे में मौजूदा समय 634 निकाय हैं। इसमें 14 नगर निगम, 193 पालिका परिषद और 427 नगर पंचायतें हैं। निकाय स्वायत्तशासी संस्था में आते हैं। इसलिए इनको स्वयं आय के संसाधन तलाशने होते हैं। शासन इन्हें मदद तो करता है, पर कुछ शर्तों के साथ।
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निकायों के आय का मुख्य स्रोत हाउस टैक्स व अन्य करों की वसूली है। निकायों का दायरा काफी समय से नहीं बढ़ा है, लेकिन शहरों का क्षेत्रफल तेजी से बढ़ रहा है। शहरों से सटे गांवों में बिल्डर व प्रापर्टी डीलर जमीनें लेकर सोसायटी बसा रहे हैं।
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इस तरह से की जाएगी हाउस टैक्स की वसूली

गांवों का शहरीकरण होने से निकायों पर काम कराने का दबाव तेजी से बढ़ा है। क्षेत्रीय पार्षद हो या अन्य जनप्रतिनिधि दबाव बनाकर इन क्षेत्रों में लोगों को मूलभूत सुविधाएं दिला रहे हैं। लेकिन निकायों को पूरी तरह से हाउस टैक्स नहीं मिल पा रहा है।

इसलिए नगर विकास विभाग चाहता है कि ऐसी सोसायटियों को टैक्स के दायरे में लाया जाए। निकायों ने यदि सोसायटियों में काम करा रहे हैं, तो वहां से अनिवार्य रूप से हाउस टैक्स की वसूली की जाए।

नगर विकास विभाग शहरों का नए सिरे से सर्वे कराएगा। इसमें ऐसी सोसायटियों को चिह्नित किया जाएगा जहां निकाय विकास कार्य करा रहे हैं और वहां से हाउस टैक्स की वसूली नहीं हो रही है। ऐसी सोसायटियों में बने एसोसिएशन को नोटिस भेजा जाएगा। इसके बाद हाउस टैक्स वसूली का कैंप लगाया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे हाउस टैक्स वसूली में इजाफा होगा और निकायों की आय बढ़ेगी।
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