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इन जिलों में नहीं खुलेंगे नए पॉलीटेक्निक, ये है वजह

Mon, 15 Oct 2018 11:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : डेमो
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यूपी में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और संस्थाओं को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए सरकार के स्तर पर पहल शुरू कर दी गई है। इसके तहत प्राविधिक शिक्षा विभाग ने डिग्री व डिप्लोमा स्तरीय तकनीकी संस्थाओं की स्थापना और नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए नए सिरे से नीति (ड्राफ्ट प्रास्पेक्टिव प्लान) तैयार की है।

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प्रस्तावित नीति में सरकारी और निजी क्षेत्र द्वारा संचालित इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलीटेक्निक की स्थापना केलिए नए सिरे से मानक तय किए जाएंगे। प्रस्तावित प्लान के मुताबिक उन जिलों में नए सरकारी पॉलीटेक्निक नहीं खोले जाएंगे, जिनमें पॉलीटेक्निक के छात्रों के प्लेसमेंट का प्रतिशत 25 से कम होगा।

उन जिलों में पहले संचालित पॉलीटेक्निक में ही नए पाठ्यक्रम शुरू करने मंजूरी दी जाएगी, जिनमें कोई नई पॉलीटेक्निक निर्माणाधीन नहीं होगा। अलबत्ता नया पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए जिले में प्लेसमेंट का प्रतिशत 25 से अधिक होना अनिवार्य होगा। प्रस्तावित प्लान में इसके अलावा भी कई बिंदु शामिल किए गए हैं।

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20 नवंबर तक मांगे आपत्ति व सुझाव

डेमो - फोटो : डेमो
प्रस्तावित नीति लागू करने से पहले प्राविधिक शिक्षा विभाग ने निजी संस्था संचालकों समेत अन्य लोगों से भी आपत्ति व सुझाव मांगे हैं। 20 नवंबर तक आपत्तियां मिलने केबाद उनका निस्तारण किया जाएगा। इसके बाद ही नई नीति को लागू किया जाएगा।
 
ड्राफ्ट प्रास्पेक्टिव प्लान के प्रमुख बिंदु
सरकारी क्षेत्र-डिप्लोमा स्तर
25 प्रतिशत से कम प्लेसमेंट वाले जिलों में नहीं खुलेंगे नए सरकारी पॉलीटेक्निक।
25 प्रतिशत से अधिक प्लेसमेंट वाले जिलों में ही मिलेगी नए पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी।
निजी क्षेत्र
10 प्रतिशत से अधिक सीटें खाली रहने पर उस जिले में निजी पॉलीटेक्निक खोलने को अनुमति नहीं।
10 प्रतिशत से कम सीटें खाली होने और एक भी निजी संस्था नहीं होने की स्थिति में संबधित जिले में सिर्फ दो ही पॉलीटेक्निक खोले जाएंगे।
 
निजी इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की नहीं मिलेगी अनुमति
प्रस्तावित नीति में तय किया गया है कि मौजूदा संस्थानों में सीटें खाली रहने के मद्देनजर फिलहाल किसी भी जिले में नए निजी इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सचिव प्राविधिक शिक्षा ने बताया कि निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में उपलब्ध सीटों की तुलना में 62 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं। हालांकि केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री की घोषणाओं को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है। 
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