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इन गंभीर बीमारियों के लिए बन रही हैं नयी तरह की दवाइयां

Fri, 26 Feb 2016 01:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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पूरी दुनिया में ट्यूबरक्युलोसिस (टीबी) और मलेरिया सबसे बड़ी बीमारी बनी हुई हैं। इसके बाद भी शोधकर्ताओं से यह दोनों ही उपेक्षा का सामना कर रही हैं।
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इसका असर सीधे तौर पर इन बीमारियों के लिए जरूरी नई दवाओं के शोध और विकास पर पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को सीडीआरआई में यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ़ डुंडी के मेडिसिनल केमेस्ट्री विभाग के प्रमुख प्रो. इयान गिल्बर्ट ने ये बातें कहीं।

वह यहां चार दिवसीय 6वीं करेंट ट्रेंड्स इन ड्रग डिस्कवरी एंड रिसर्च (सीटीडीडीआर-2016) के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

प्रो. गिल्बर्ट ने कहा कि जिस तरह से बीमारियों का बोझ बढ़ा है। इससे मृत्यु दर भी बढ़ रही है। इसमें बड़ा योगदान टीबी और मलेरिया का है। हमें इन दोनों बीमारियों के लिए नई दवाओं की खोज के काम को तेज करना होगा।
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रिसर्च टीम ने बनायी एंटी मलेरियल कंपाउंड डीडीडी107498 दवा

इसके लिए फि नोटाइप बेस्ड और टारगेट बेस्ड दोनों ही तरह से दवा की तलाश करनी होगी। उन्होंने बताया कि उनकी रिसर्च टीम ने एक एंटी मलेरियल कंपाउंड डीडीडी107498 बनाया है।

यह कंपाउंड दवा के रूप में तैयार होकर एक ही खुराक में मलेरिया की बीमारी को ठीक कर देता है। इसे अब दवा के रूप में बनाने की कोशिश लैब में हो रही है।

सीडीआरआई की निदेशिका डॉ. मधु दीक्षित ने बताया कि पूरी कांफ्रेंस के दौरान पूरी दुनिया के वैज्ञानिक मलेरिया, फाइलेरिया,लिश्मानिया, एचआइवी, टीबी, डायबिटीज, मोटापा, न्यूरोडीजेनरेटिव, सीएनएस व सीवीएस से जुड़ी बीमारियों, कैंसर, प्रजनन और हड्डियों से जुड़ी बीमारियों केइलाज पर चर्चा करेंगे।

इससे नए ड्रग शोध का रास्ता खुलेगा। कार्यक्रम में सीडीआरआई के पूर्व निदेशक व आईआईएससी में वैज्ञानिक प्रो. टीके चक्रवर्ती भी मौजूद रहे।
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