एसजीपीजीआई में मैटरनल एंड फीटल मेडिसिन में डीएम का कोर्स शुरू होगा। इस संबंध में संस्थान ने राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद को प्रस्ताव भेजा है। एसजीपीजीआई पहला संस्थान है, जो इस विषय में एमडी क ोर्स शुरू कर रहा है। यह जानकारी मैटरनल एंड री प्रोडक्टिव हेल्थ (एमआरएच) विभागाध्यक्ष डॉ. मंदाकिनी प्रधान ने दी। वह शनिवार को विभाग के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने बताया कि विभाग ने डीएम कोर्स शुरू करने की सभी तैयारी कर ली है। यहां अभी तक पोस्ट डॉक्टोरल सर्टिफिकेट कोर्स (पीडीसीसी) चला रहा है। विभाग में अब तक इंट्रा यूट्राइन ब्लड ट्रांसफ्यूजन तकनीक से करीब एक हजार से ज्यादा गर्भस्थ शिशुओं को खून चढ़ा कर उनकी जान बचाई जा चुकी है। संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने कहा कि विभाग में यूपी समेत कई प्रदेशों से आने वाली उच्च जोखिम की महिलाओं एवं उनके गर्भ में पल रहे भ्रूण का उपचार किया जा रहा है। इस दौरान डॉ. नीता सिंह ने कहा कि डीएम कोर्स शुरू होने से अन्य संस्थानों को विशेषज्ञ डॉक्टर मिल सकेंगे। इससे गर्भस्थ शिशु और प्रसूता की जान बचाने में मदद मिलेगी। डॉ. इंदुलता साहू ने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में मां और उसके भ्रूण के स्वास्थ्य की देखभाल अहम होती है। गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और थायरॉयड की समस्या है तो उन्हें नियमित चिकित्सक के संपर्क में रहना चाहिए। इस दौरान डॉ. कमल मेहरोत्रा, दिल्ली की डॉ. रीवा त्रिपाठी, डॉ. एस सुरेश, डॉ. श्री विद्या आदि ने मैटरनल एवं फीटल मेडिसिन के बारे में जानकारी दी।