समाजवादी आवास योजना में अफोर्डेबल फ्लैट बनाने के लिए नए बिल्डरों को भी मौका दिया जाएगा। किसी बिल्डर के पास यदि एक वर्ष का अनुभव है और उसका सालाना टर्नओवर ढाई करोड़ रुपये है तो उसे भी इस योजना में फ्लैट बनाने का मौका दिया जाएगा। शर्त सिर्फ इतनी है कि बिल्डर को आवास बंधु में पंजीकरण कराना होगा।
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने इस संबंध में दिशा-निर्देश का प्रारूप जारी कर दिया है।निम्न एवं मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ते फ्लैट उपलब्ध मुहैया कराने के लिए समाजवादी आवास योजना शुरू की गई है।
इन फ्लैटों की दरें पहले ही 15 से 30 लाख रुपये तय की जा चुकी है। ये फ्लैट विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद के साथ निजी बिल्डर भी बना सकेंगे। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने इसके लिए पात्रता तय कर दी है।
ऐसे फ्लैटों को बनाने के लिए बिल्डर कंसोर्टियम (कई बिल्डरों का समूह) बना सकते हैं। इसमें सदस्यों की अधिकतम सीमा पर प्रतिबंध नहीं होगा। कंसोर्टियम के सभी सदस्यों के बीच मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट अनिवार्य होगा।
इसमें सभी सदस्यों के सालाना टर्नओवर का ब्यौरा देना होगा। शर्त के मुताबिक लीड मेंबर का शेयर न्यूनतम 26 प्रतिशत होगा, शेष हिस्सेदारी अन्य सदस्यों की होगी।
ऐसे होगा पंजीकरण
अफोर्डेबल फ्लैट बनाने के लिए विकासकर्ता को आवास बंधु कार्यालय से 500 रुपये में पंजीकरण पुस्तिका प्राप्त करनी होगी। इसे वेबसाइट https://www.awas.up.nic.in से भी डाउनलोड किया जा सकेगा। डाउनलोड किए जाने वाले पंजीकरण फॉर्म के साथ 500 रुपये का बैंक ड्राफ्ट लगाना होगा।
‘ए’ श्रेणी के लिए पांच लाख, ‘बी’ के लिए चार लाख, ‘सी’ के लिए तीन लाख और ‘डी’ श्रेणी के लिए दो लाख रुपये पंजीकरण राशि जमा करनी होगी। प्रोसेसिंग फीस के रूप में ‘ए’ श्रेणी से एक लाख, ‘बी’ से 75,000, ‘सी’ से 50,000 और ‘डी’ श्रेणी से 25,000 रुपये लिया जाएगा।
पंजीकरण व प्रोसेसिंग फीस हर साल कॉस्ट इंडेक्स के आधार पर पुनरीक्षित होगी। पंजीकरण केवल तीन साल के लिए होगा। पंजीकरण निरस्त होने पर विकासकर्ता को जमा राशि वापस नहीं की जाएगी।
चार श्रेणियों में पंजीकरण
समाजवादी आवास योजना में चार श्रेणियों में पंजीकरण किया जाएगा। ‘ए’ श्रेणी के लिए सालाना टर्नओवर 25 करोड़ के साथ ही 100 एकड़ जमीन व 10 वर्ष का अनुभव चाहिए। ‘बी’ श्रेणी में 10 करोड़ का टर्नओवर, 50 एकड़ जमीन व पांच वर्ष का अनुभव चाहिए।
‘सी’ श्रेणी में पांच करोड़ टर्नओवर, 25 एकड़ जमीन व तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए। ‘डी’ श्रेणी के लिए ढाई करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर के साथ पांच से 10 एकड़ जमीन व एक वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
पंजीकरण के लिए विकासकर्ता का तीन साल का बैलेंस शीट देखा जाएगा। विकासकर्ता का सालाना टर्नओवर केवल रियल एस्टेट के क्षेत्र में ही देखा जाएगी। इसकी पुष्टि के लिए परियोजना के संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी कंपलीशन सर्टिफिकेट तथा चालू परियोजना के संबंध में प्रमाण पत्र लिया जाएगा।