कोविड-19 के कठिन दौर के बाद सोमवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में एमबीबीएस और बीडीएस के नए बैच ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
संस्थान में डॉक्टर बनने के लिए पूरे प्रदेश के विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है। इनमें से काफी विद्यार्थी ऐसे थे जो परिवार से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले व्यक्ति थे।
वहीं केजीएमयू से ही पढ़ाई करने के लिए कुछ डॉक्टरों की तीसरी पीढ़ी भी यहां पहुंची। कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने सभी का स्वागत किया।
अटल बिहारी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में विद्यार्थियों के स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों को डॉक्टरों के लिए निर्धारित सफेद कोट पहनाया गया तथा पेशेगत शपथ दिलाई गई।
कुलपति ने विद्यार्थियों से पढ़ाई के साथ ही चहुंमुखी व्यक्तित्व विकास पर जोर देने के लिए भी कहा। साथ ही अनुशासित रहने एवं विवि की गरिमा को बनाए रखने को भी कहा।
इस मौके पर चीफ प्रॉक्टर प्रो. क्षितिज श्रीवास्तव, डीन एकेडेमिक प्रो. उमा सिंह, प्रति कुलपति प्रो. विनीत शर्मा, प्रो. आरके सिंह उपस्थित रहे।
रोमांचित करता है तीसरी पीढ़ी के रूप में आना
ग्रैंड फादर प्रो. रमेश चंद्रा इस संस्थान के विद्यार्थी के साथ ही प्रिंसिपल भी रह चुके हैं। इसके बाद मेरी मां प्रो. तूलिका चंद्रा और पिता प्रो. राजीव अग्रवाल ने इसी संस्थान से एमबीबीएस की पढ़ाई की है। मेरी एक बहन ने भी यहां से पढ़ाई की है। अब मैंने यहां पर दाखिला लिया है। यह अनुभव रोमांच देने वाला है। मेरा मकसद है कि मैं इस संस्थान और अपने परिवार दोनों की गरिमा के हिसाब से प्रदर्शन कर सकूं। - ऋषभ अग्रवाल
परिवार का पहला डॉक्टर
मेरी मां सुनीता गुप्ता शिक्षक और पिता मनोज गुप्ता एडवोकेट हैं। परिवार में अभी तक कोई डॉक्टर नहीं हुआ है। इसलिए डॉक्टर के लिए चयनित होना ही बड़ी बात है। केजीएमयू का नाम पूरे विश्व में है। ऐसे संस्थान से जुड़ना बड़ा अनुभव है। कोशिश रहेगी कि डॉक्टर बनकर परिवार का नाम रोशन कर सकूं। - वैभव कसौधन
बड़ी बात है केजीएमयू से जुड़ना
नीट में चयनित होने के बाद पहली पसंद केजीएमयू था। यह संस्थान सौ साल से ज्यादा का इतिहास रखता है। इसमें पढ़ाई का मौका मिलना बड़ी बात है। पिता डॉ. शिव नारायण यादव और मां अंजू यादव दोनों शिक्षक हैं। दोनों का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं। अब दाखिला लेकर उनका सपना पूरा कर सकूंगा। इसमें मेरे परिवार का बहुत योगदान है। - गौरव यादव