विधान परिषद सभापति रमेश यादव ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को विधान परिषद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया है। वे बसपा से विधान परिषद के लिए चुने गए थे, पर बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। सभापति ने लंबी सुनवाई के बाद दिए अपने आदेश में कहा है कि कांग्रेस में शामिल होने की तिथि 22 फरवरी 2018 से ही वे अयोग्य माने जाएंगे।
विधान परिषद में बसपा दल के तत्कालीन नेता सुनील कुमार चित्तौड़ ने उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए 28 फरवरी 2018 को याचिका दी थी। नसीमुद्दीन सिद्दीकी 23 जनवरी 2015 को बसपा की ओर से विधान परिषद केसदस्य के रूप में निर्वाचित हुए थे।
कांग्रेस की औपचारिक सदस्यता ग्रहण किए जाने के बाद बसपा की ओर से संविधान की दसवीं अनुसूची और उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य (दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता) नियमावली-1987 के तहत उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए याचिका प्रस्तुत की गई थी।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी की ओर से तर्क दिया गया कि विपक्षी को बसपा से निष्कासित कर दिया गया था। इस पर विधान परिषद के सभापति ने उनको असंबद्ध घोषित करते हुए सदन में मान्यता प्रदान की। सिद्दीकी केअनुसार उन्होंने असंबद्ध सदस्य के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। विपक्षी की ओर से इस पर अत्यधिक जोर दिया गया कि संविधान की 10वीं अनुसूची के अंतर्गत असंबद्ध सदस्य के बारे में कोई व्याख्या नहीं की गई है।