उन्होंने कहा कि बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी हस्ताक्षर से खाता खोलकर रिश्तेदारों ने एक करोड़ तीन लाख रुपये का गबन कर लिया। उन्होंने दो साल के दौरान बैंक के रीजनल हेड, नॉर्थ हेड से लेकर कंट्री हेड तक से मदद मांगी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अरुणिमा ने बताया कि बैंक के खाता खोलने से संबंधित कागजात और उनके पासपोर्ट-वीजा के बारे में सारी जानकारियां पुलिस ने ले ली है।
अरुणिमा सिन्हा ने दिव्यांग बच्चों के विकास के लिए अरुणिमा फाउंडेशन ट्रस्ट बनाया। ट्रस्ट की संस्थापक, मैनेजिंग ट्रस्टी व महासचिव अरुणिमा हैं जबकि उनकी बहन लक्ष्मी सिन्हा के पति गोरखपुर के बांसगांव निवासी ओमप्रकाश त्रिपाठी और उनके करीबी बरेली के जगदेव प्रसाद उपाध्यक्ष थे।
लक्ष्मी और भाई राहुल सिन्हा भी ट्रस्ट में थे। पैसा बैंक ऑफ इंडिया की सरोजनीनगर शाखा स्थित खाते में जमा होता था। अरुणिमा ने खर्चों के लिए हस्ताक्षरित चेकबुक ऑफिस में रख दी थी। परिजनों ने फाउंडेशन का सामान, दस्तावेज ले लिए। अरुणिमा ने बैंक खाते के संचालन पर रोक लगा दी।
12 दिसंबर 2018 को अरुणिमा देश से बाहर गईं तो रिश्तेदारों ने उनके फर्जी हस्ताक्षर से एचडीएफसी बैंक की चौक शाखा में नया खाता खुलवा लिया। यही नहीं ई-मेल का दुरुपयोग करते हुए स्किल इंडिया को सूचना देकर वहां फाउंडेशन का खाता नंबर बदलवा दिया।