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जाली हस्ताक्षर से खोला था एवरेस्ट विजेता अरुणिमा सिन्हा के फाउंडेशन का बैंक खाता

Tue, 21 Jul 2020 04:47 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अरुणिमा सिन्हा - फोटो : SELF
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विश्व की पहली दिव्यांग एवरेस्ट विजेता अरुणिमा सिन्हा की फाउंडेशन पर कब्जा करने के लिए उसके रिश्तेदारों ने बैंक में भी फर्जीवाड़ा किया था। शातिरों ने अरुणिमा के जाली हस्ताक्षर बनाकर फाउंडेशन के नाम से खाता खुलवाया था। अरुणिमा का आरोप है कि इस फर्जीवाड़े में उसके रिश्तेदारों के साथ बैंक के पांच अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हैं।
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उन्होंने पुलिस से अन्य आरोपियों और बैंक के अधिकारियों व कर्मचारियों को गिरफ्तार करने की मांग की है। उधर, सरोजनीनगर इंस्पेक्टर आनंद शाही ने बताया कि फर्जीवाड़े में अरुणिमा के बहनोई ओम प्रकाश त्रिपाठी को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है, जबकि बाकी आरोपियों की जांच चल रही है।

पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा ने बताया कि चौक स्थित निजी बैंक में उनकी फाउंडेशन के नाम से 21 दिसंबर 2018 को खाता खुलवाया गया था। जब खाता खुलवाया गया था तो वह अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट विंसेंट फतेह करने के लिए गई थीं। उनकी अनुपस्थिति में खाता खुलवाया गया।
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हैरत की बात यह है कि बैंक के अधिकारियों ने खाता खुलवाने के लिए भरे गए फार्म पर अंग्रेजी में लिखा था कि ग्राहक की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। बकौल अरुणिमा, जब वह देश में ही नहीं थीं तो बैंक में उनकी उपस्थिति कैसे दर्शा दी गई। यही नहीं खाता खुलवाने के लिए जो हस्ताक्षर बनाए गए थे, उसकी भी स्पेलिंग गलत थी। 
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यह है मामला

उन्होंने कहा कि बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी हस्ताक्षर से खाता खोलकर रिश्तेदारों ने एक करोड़ तीन लाख रुपये का गबन कर लिया। उन्होंने दो साल के दौरान बैंक के रीजनल हेड, नॉर्थ हेड से लेकर कंट्री हेड तक से मदद मांगी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अरुणिमा ने बताया कि बैंक के खाता खोलने से संबंधित कागजात और उनके पासपोर्ट-वीजा के बारे में सारी जानकारियां पुलिस ने ले ली है। 

अरुणिमा सिन्हा ने दिव्यांग बच्चों के विकास के लिए अरुणिमा फाउंडेशन ट्रस्ट बनाया। ट्रस्ट की संस्थापक, मैनेजिंग ट्रस्टी व महासचिव अरुणिमा हैं जबकि उनकी बहन लक्ष्मी सिन्हा के पति गोरखपुर के बांसगांव निवासी ओमप्रकाश त्रिपाठी और उनके करीबी बरेली के जगदेव प्रसाद उपाध्यक्ष थे।

लक्ष्मी और भाई राहुल सिन्हा भी ट्रस्ट में थे। पैसा बैंक ऑफ इंडिया की सरोजनीनगर शाखा स्थित खाते में जमा होता था। अरुणिमा ने खर्चों के लिए हस्ताक्षरित चेकबुक ऑफिस में रख दी थी। परिजनों ने फाउंडेशन का सामान, दस्तावेज ले लिए। अरुणिमा ने बैंक खाते के संचालन पर रोक लगा दी।

12 दिसंबर 2018 को अरुणिमा देश से बाहर गईं तो रिश्तेदारों ने उनके फर्जी हस्ताक्षर से एचडीएफसी बैंक की चौक शाखा में नया खाता खुलवा लिया। यही नहीं ई-मेल का दुरुपयोग करते हुए स्किल इंडिया को सूचना देकर वहां फाउंडेशन का खाता नंबर बदलवा दिया। 
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