नामांकन के बाद फिरोज गांधी का एक आदमी नंदकिशोर के पास आया और उनका संदेश दिया, शाम को साहब ने अपने निवास पर चाय पर बुलाया है। नंदकिशोर शाम को फिरोज गांधी के निवास पर पहुंचे। वहां इंदिरा गांधी एवं फिरोज गांधी ने उनका दरवाजे पर स्वागत किया। अंदर ले गए। साथ चाय पी। काफी देर तक बात करते रहे। फिर वह नंदकिशोर को बाहर तक छोड़ने आए। हाथ मिलाया और बोले, चुनाव चलता रहेगा, लेकिन कभी-कभी चाय व काॅफी भी चलती रहे। चुनाव लड़ने के दौरान
यह सिलसिला चलता रहा।
अक्सर फिरोज गांधी और नंदकिशोर शाम को एक साथ बैठते। बाद में तो नंदकिशोर जब भी फिरोज गांधी के यहां पहुंचे, तो इंदिरा गांधी खुद अपने हाथ से नंदकिशोर के लिए चाय व काफी बनातीं और पति फिरोज एवं नंदकिशोर के साथ खुद भी बैठतीं। कुछ लोगों ने इसकी शिकायत डॉ. लोहिया से की, तो लोहिया बोले, इसमें क्या बुराई है? लोकतंत्र है। हम कांग्रेस से वैचारिक लड़ाई लड़ रहे हैं, न कि निजी। वैचारिक लड़ाई में संवाद बना रहे, यही तो लोकतंत्र की खूबसूरती है।