हेलाल कमेटी के कन्वेनर व अयोध्या मामले के जानकार खालिक अहमद खां बताते हैं कि केंद्र सरकार की याचिका हिंदुओं को मूर्ख बनाने का प्रयास है। 1 मार्च 2003 को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर असलम उर्फ भूरे की याचिका पर 13-14 मार्च 2002 को दिए गए निर्णय को वापस लेने व अधिग्रहीत क्षेत्र में पूजा-पाठ की अनुमति मांगी थी। जिस पर 31 मार्च 2003 को पांच जजों की बेंच ने कहा था कि जब तक विवादित भूमि पर निर्णय नहीं आ जाता अधिग्रहीत क्षेत्र में कुछ भी नहीं किया जाए।
खालिक अहमद बताते हैं कि 2010 में विवादित भूमि पर एक निर्णय आ चुका है लेकिन इस निर्णय के विरोध में अपील दायर की जा चुकी है जिसका मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है इसलिए यह फाइनल जजमेंट नहीं माना जाएगा।
जब तक फाइनल जजमेंट नहीं आ जाता अधिग्रहीत भूमि पर कुछ नहीं किया जा सकता। अधिग्रहीत क्षेत्र में रामजन्मभूमि न्यास की कोई जमीन नहीं है।