19 अक्तूबर 2017 को नौकरी के सिलसिले में सऊदी अरब जाने वाला जंग बहादुर वर्ष 2020 में घर आना चाहता था। हालांकि इसी बीच कोविड शुरू हो जाने से उसने आने का प्लान निरस्त कर दिया। छह जुलाई को सुबह पिता राज नारायण व दोपहर बाद पुत्र सौरभ से बात कर जंग बहादुर ने जन्माष्टमी के दौरान घर आने की बात कही थी। हालांकि जन्माष्टमी के पहले उसके मौत की खबर आ गई।
जंग बहादुर के परिवार में बुजुर्ग पिता राज नारायण व मां रामावती के अलावा पत्नी मंजू देवी, स्नातक की पढ़ाई कर रहे 19 वर्षीय पुत्र सौरभ, इंटर में पढऩे वाली 17 वर्षीय पुत्री अंजलि व कक्षा सात में पढऩे वाला 12 वर्षीय पुत्र गौरव है। जंग बहादुर के मौत की सूचना मिलते ही परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। रो-रोकर परिवार के सभी सदस्यों का हाल बेहाल है।
मामले की जानकारी सामने आते ही एसडीएम सविता यादव व सीओ अर्पित कपूर के अलावा एसएचओ अरुण कुमार द्विवेदी पीडि़त के घर पहुंचे और परिवारीजनों को ढांढ़स बंधाते हुए घटना से जुड़ी जानकारी ली। परिवारीजनों ने अफसरों को रो-रोकर पूरी दास्तान बताई और जंग बहादुर का शव वापस लाने में मदद करने की गुहार लगाई।
डीएम राकेश कुमार मिश्र ने बताया कि मामला पता चलते ही शासन से जुड़े सभी बड़े अफसरों को जानकारी देने के बाद विदेश मंत्रालय व सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास को पत्र भेजा गया है। विदेश मंत्रालय व भारतीय दूतावास में तैनात अफसरों से जंग बहादुर का शव जल्द उसके परिवारीजनों तक पहुंचाने का अनुरोध किया है।