प्रवेंद्र गुप्ता
काम का बोझ कम होने के बावजूद नगर निगम में डीजल-पेट्रोल का खर्च तीन महीने में डेढ़ गुना से अधिक बढ़ गया है। मार्च में यह 3.10 करोड़ था जो मई में पांच करोड़ रुपये हो गया।
ऐसा तब है, जब सफाई और मार्ग प्रकाश विभाग में निजी कंपनियों की गाड़ियां भी लगी हैं। इसके लिए निगम भुगतान भी कर रहा है। नगर आयुक्त ने अधिक खर्च को लेकर ऑडिट के निर्देश दिए हैं।
कचरा प्रबंधन योजना के तहत तीन साल में शहर में 200 कूड़ा पड़ाव घर खत्म किए गए हैं। अब इनका कूड़ा निजी कंपनी के पोर्टेबल कॉम्पैक्टर पर जाता है।
कॉम्पैक्टर के भर जाने पर इन्हें शिवरी प्लांट तक ले जाने का काम कंपनी ईकोग्रीन की गाड़ियां करती हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है नगर निगम का तेल खर्च कम होना चाहिए था, क्योंकि जब पड़ाव घर थे तो वहां से कूड़े का उठान निगम की गाड़ियां करती थीं।
मार्ग प्रकाश का काम भी निजी कंपनी के हवाले
शहर में तीन साल से मार्ग प्रकाश की मेंटेनेंस का काम ईईएसएल कर रही है। इसके एवज में नगर निगम निजी कंपनी को प्रति एलईडी लाइट 28 रुपये महीने का शुल्क देता है। कंपनी के काम संभालने के बाद नगर निगम की जो गाड़ियां मार्ग प्रकाश के लिए चलती थीं, उनका काम खत्म हो गया। ऐसे में मार्ग प्रकाश विभाग की गाड़ियाें पर पहले जो डीजल खर्च हो रहा था, उसका फर्क निगम के कुल डीजल खर्च में दिखना चाहिए था।
हर काम में कटौती तो कैसे ज्यादा खर्च हो रहा तेल
कांग्रेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी का कहना है कि विकास के छोटे-छोटे काम के लिए नगर निगम बजट का रोना रोता है। वार्ड विकास निधि में कटौती कर दी गई, लेकिन डीजल-पेट्रोल खर्च बढ़ता जा रहा है, जबकि निजी कंपनियां भी काम कर रही हैं। ऐसे में खर्च कम होने की बजाय बढ़ रहा है तो इसकी जांच होनी चाहिए।
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किस महीने कितना हुआ खर्च
मार्च : 3.10 करोड़
अप्रैल : 4.10 करोड़
मई : 5 करोड़
रिपोर्ट के बाद जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई
कोरोना काल में सैनिटाइजेशन, गोमती मेें जलकुंभी और नालों की सफाई में नगर निगम की ही मशीनें और गाड़ियां लगी हैं। संक्रमण बाद गाड़ियां और मशीनों की संख्या बढ़ी है, जिससे खर्च बढ़ा है। फिर भी डीजल-पेट्रोल खर्च के ऑडिट के निर्देश दिए गए हैं। इसमें जांच होगी कि जितना डीजल गाड़ियाें को दिया गया, उसके हिसाब से वह कितने किमी. चली। रिपोर्ट के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होगी।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त