श्मशान घाट में रखीं अस्थियां दिखाता सेवादार।
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200 से अधिक अस्थि कलश मुक्ति पाने के लिए अपनों का इंतजार कर रहे हैं। कई सालों से रखे इन कलश को विसर्जित नहीं किया जा सका है। कोई अस्थियां लेने नहीं आ रहा है। पितृपक्ष में लोग अपने पूर्वजों की मुक्ति व आत्मा की शांति के लिए तर्पण और कर्मकांड करते हैं। तो कई लोग पितृ पक्ष में भी अपने पुरखों का कर्मकांड करने के लिए अस्थियां लेने नहीं आ रहे हैं।
2021 में पितृ पक्ष के दौरान शहर के गोपाल घाट पर कई वर्षों से लगभग एक हजार अस्थि कलश रखे थे। कोई उन्हें लेने नहीं पहुंच रहा था। तब अमर उजाला में खबर छपने के बाद समाजसेवी आकाश बजरंगी ने उन अस्थियों का विसर्जन कर दिया था। उसके बाद से यहां सैकड़ों शवों के अंतिम संस्कार हो चुके हैं।
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गोपाल घाट के सेवादार बिरजू बताते हैं, कि कई मृतकों के परिजन अंतिम संस्कार करने बाद चले गए। फूल चुनने के लिए वापस नहीं पहुंचे। कई लोगों ने फूल चुनकर कलश में रखने के बाद अस्थियां लॉकर में रखवा दीं। लेकिन लेने नहीं आए। महीनों बाद भी अस्थियां कलश में कैद हैं। 14 अक्तूबर को पितृ पक्ष का समापन हो जाएगा। अब भी मुक्ति पाने को यहां रखी अस्थियां अपनों का इंतजार कर रही हैं।
पांच तो किसी की अस्थियां सात माह से रखीं
मुक्तिधाम के सेवादार बिरजू ने बताया कि पितृ पक्ष शुरू होने के बाद कई लोग अपने पूर्वजों की अस्थियां ले गए हैं। इसके बाद भी 200 से अधिक अस्थियां यहां अपनों के आने के इंतजार में हैं। बिरजू के मुताबिक कई अस्थि कलश छह से सात माह से रखे हैं। इन्हें लेने कोई नहीं आया है।
विसर्जन न करने वालों के लिए पितृ पक्ष की महत्ता अधिक
पुरखों की मुक्ति के लिए तर्पण और विसर्जन करने का पितृ पक्ष उत्तम समय माना जाता है। कर्मकांड कराने वाले विद्वानों के अनुसार पितृ पक्ष में रीति-रिवाज से पूजा पाठ करने पर पितरों को मुक्ति व तृप्ति मिलती है। पूर्वज प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद भी वंशजों को प्रदान करते हैं। जिन्होंने अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन नहीं किया, उनके लिए पितृ पक्ष की महत्ता सबसे अधिक है।