मुख्तार अंसारी के करीबी गुर्गे शकील हैदर के खिलाफ 25-30 पीड़ितों ने चौक एसीपी कार्यालय में तहरीर देकर केस दर्ज करने की मांग की है।
आरोप है कि इन पीड़ितों से जालसाज शकील ने जाली दस्तावेज के आधार पर जमीन बेची और मोटी रकम हड़प ली। फिलहाल शकील जेल में बंद है। उसकी जमानत अर्जी भी कोर्ट ने खारिज कर दी है। लेकिन कुछ रसूखदार व सफेदपोश उसे छुड़ाने में जुटे हैं।
पुलिस के मुताबिक, पुराने लखनऊ के शीशमहल में रहने वाले शकील हैदर ने अमीनाबाद के पंजाब नेशनल बैंक (पुराना यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया) की शाखा से हिंद कंस्ट्रक्शन प्रोडक्ट प्रा. लि. और हिंद बिल्डटेक कंपनी के नाम से लोन कराया।
बैंक के अधिकारी के मुताबिक, हिंद कंस्ट्रक्शन प्रोडक्ट प्रा. लि. के नाम से 65 करोड़ का लोन कराया गया। यह लोन हासिल करने में शकील के अलावा हनी अब्बास, वारिस हसन और तनवीर अहमद शामिल थे।
वहीं, दूसरी कंपनी हिंद बिल्डटेक के नाम से 42 करोड़ का लोन कराया था। किस्त में आनाकानी करने पर बैंक अफसरों ने रिकवरी के लिए टीम लगाई।
इस पर शकील ने अफसरों को धमकी दी और वसूली नहीं हो सकी। इस बीच यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को पंजाब नेशनल बैंक में मर्ज कर दिया गया। इसके बाद मामले की जांच पीएनबी के अधिकारी करने लगे।
70 लोगों को कर दी फर्जी रजिस्ट्री
पुलिस के मुताबिक, शकील ने बैंक में गिरवी रखे गए ठाकुरगंज के बरावनकला की जमीनों के जाली दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद करीब 70 लोगों को एक हजार से 3000 वर्गफीट तक की जमीनों की रजिस्ट्री कर दी। रजिस्ट्री कार्यालय में दाखिल खारिज के लिए जमीन मालिकों ने आवेदन किया तो पता चला कि जमीन के दस्तावेज पहले से ही बैंक में गिरवी हैं। इस पर चार लोगों ने डीसीपी पश्चिम सोमेन वर्मा के कार्यालय में शिकायत की। जांच के बाद वजीरगंज थाने में केस दर्ज कर शकील को 12 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं, फर्जीवाड़े की जानकारी समाचार पत्रों से मिलने पर अन्य रजिस्ट्री कराने वालों ने भी पुलिस से संपर्क करना शुरू किया। पिछले दिनों 25-30 पीड़ितों ने चौक एसीपी कार्यालय में शिकायती पत्र दिया। एसीपी चौक इंद्रप्रकाश सिंह के मुताबिक, सभी मामलोें की जांच डीसीपी पश्चिम के निर्देश पर की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया जाएगा।
जांच के दायरे में बैंक अधिकारी भी
शकील की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा पुलिस ने बढ़ा लिया है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, शकील ने अपने रुतबे का इस्तेमालकर कई कंपनियां खोली। इसमें हिंद इंफ्रा सिटी प्रा. लि. नाम से एक कंपनी खोली। जिसकी पेडअप कैपिटल महज 8 लाख रुपये है। इस कंपनी के नाम से यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (जो अब पीएनबी में सामयोजित हो गई) से 100 करोड़ रुपये से अधिक का लोन कराकर हड़प लिया। उसने अन्य कंपनियों के नाम से सड़क निर्माण व भवन निर्माण के नाम पर लोन कराया था। जिसकी जांच ईओडब्ल्यू कर रही है। मामले में वारंट भी जारी हुआ था। अब इस जांच में बैंक के अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल किए जाएंगे। जिन्होंने लोन दिलाने व फर्जीवाड़े में मदद की थी।