घोटाले की जांच के लिए अधिकारी विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर रहे हैं। विजिलेंस स्मारकों के निर्माण से जुड़ी अन्य अनियमितताओं की भी जांच कर सकती है।
विजिलेंस को जो जांच सौंपी गई है, उसमें स्मारकों के निर्माण में पत्थर का खनन, उसकी तराशने व मोल्ड करने में आने वाली लागत, उसके परिवहन में हुए खर्च आदि के कार्य में हुई अनियमितता की जांच होनी है।
लेकिन स्मारकों के निर्माण से जुड़े कई अन्य कार्यों का आर्थिक अपराध शाखा ने अपनी जांच मे हवाला नहीं दिया है।
इसमें बिजली के काम के एवज में बड़े पैमाने पर हुई धांधली का मामला भी सामने आ रहा है।
ईओडब्ल्यू के सूत्रों का कहना है कि जब शाखा द्वारा जांच की गई थी, तब भी यह सारी अनियमितताएं सामने आई थीं। लेकिन ऊपर से कहा गया कि जिस बिंदु की जांच करनी है, वही की जाए।
इसलिए तमाम अन्य अनियमितताओं को नजरअंदाज किया गया।
दूसरी तरफ विजिलेंस के सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी भले ही स्मारकों के निर्माण में अन्य कार्यों में हुई अनियमितताओं को लेकर कोई ठोस कार्रवाई न करे, लेकिन अपनी रिपोर्ट में ऐसी अनियमितताओं का उल्लेख कर सकती है।
इसके अलावा विजिलेंस के अधिकारियों विधि विशेषज्ञों से परामर्श किया है।
जिसके तहत विजिलेंस राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन उस महाप्रबंधक से भी पूछताछ कर सकती है, जिसका नाम ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट से हटा दिया था।
इटावा से जुड़े इस अधिकारी की पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी से खासी नजदीकी थी।
विजिलेंस की जानकारी में आ चुका है कि इस महाप्रबंधक के अधीन स्मारकों के निर्माण से संबंधित कई महत्वपूर्ण कार्य कराए गए और उनकी संस्तुति पर उसके भुगतान भी किए गए।
जिन ठेकेदारों को भुगतान किया गया, वह उनकी फर्मों से जुड़े हुए हैं, जिनके नाम कंसोर्टियम में हैं।