उत्तर प्रदेश सरकार ने सेवानिवृत्त चिकित्सकों की पेंशन से वसूल की गई धनराशि तत्काल वापस करने का आदेश दिया है। अपर मुख्य सचिव वित्त एस. राधा चौहान ने हाईकोर्ट के आदेश पर अमल संबंधी आदेश जारी कर दिया है।
शासन ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के 24 अगस्त 2009 के पूर्व सेवानिवृत्त राजकीय चिकित्सकों/दंत शल्य चिकित्सकों की पेंशन/पारिवारिक पेंशन के एक जनवरी, 2016 से पुननिर्धारण के फार्मूले पर लंबे समय से विवाद था।
24 अगस्त 2009 से पूर्व सेवानिवृत्त चिकित्सकों के पेंशन का निर्धारण मूल वेतन में एनपीए की वह धनराशि जोड़कर की जा रही थी, जो वह सेवानिवृत्त से ठीक पूर्व में प्राप्त किए थे। बाद में मूल वेतन का 20 प्रतिशत एनपीए की व्यवस्था लागू हुई, जिसका लाभ ये पेंशनर भी पाने लगे।
मगर, शासन के वित्त विभाग ने 24 अगस्त 2009 से पूर्व सेवानिवृत्त चिकित्सकों के पेंशन का निर्धारण मूल वेतन में 20 प्रतिशत एनपीए जोड़कर दिए जाने पर रोक लगा दी। तर्क दिया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जो चिकित्सक रिटायर हुए, वे ही यह लाभ पा सकते हैं।
आदेश को स्थगित करने के बाद रद्द किया गया
पुराने पेंशनरों को नई व्यवस्था से प्राप्त लाभ की वसूली का आदेश कर दिया। मामला हाईकोर्ट में गया, जहां पहले सरकार के आदेश को स्थगित किया गया और बाद में इसे रद्द कर दिया गया। इस बीच शासन ने कई सेवानिवृत्त चिकित्सकों के पेंशन से वसूली भी कर ली। हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद शासन ने वसूल की गई पेंशन वापस करने का आदेश जारी कर दिया है। अपर मुख्य सचिव वित्त ने कहा है कि जिन सेवानिवृत्त चिकित्सकों की पेंशन से वसूली की गई है, उन्हें वसूल की गई धनराशि अविलंब वापस की जाए।