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बुंदेलखंड में बिना पानी पिये बोले मोदी

Sat, 26 Oct 2013 11:32 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ
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नरेंद्र मोदी कानपुर से बुंदेलों की धरती झांसी पहुंचे तो और आगे बढ़ गए।
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शायद यह बुंदेलखंड की धरती का असर था कि मोदी कानपुर की तुलना में बोले कम पर ज्यादा तल्ख और ज्यादा सटीक हमलों के साथ।

कानपुर में भाषण के बीच पानी पिया था। पर, बुंदेलों की धरती झांसी में वह बिना पानी पिए बोले।

कानपुर में बसपा पर उनका आक्रमण न के बराबर था तो झांसी में बसपा भी उनके हमले की जद में आ गई।

मोदी की कानुपर से बुंदेलखंड की यात्रा में सात दिन की ही अंतर रहा है। पर, सात दिन में मोदी के भाषण में कई बदलाव दिखे।

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वह भगवा छवि को और ज्यादा निर्मम तरीके से तोड़ते हुए दिखे। कानुपर में मोदी में ‘अटल ’ का अक्स दिखा था।

बुंदेलखंड में मोदी अटल की तरह लोकसभा की चुनावी लड़ाई को कांग्रेस बनाम भाजपा के बीच समेटने का एजेंडा सेट करते दिखे। भाजपा ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है।

पर, मोदी बोले कि वह प्रधानमंत्री नहीं सिर्फ चौकीदार बनना चाहते हैं। ऐसे चौकीदार जिसके रहते देश की तिजोरी को कोई ‘पंजा’ न मार सके।

हर पहलू पर नजर
कानपुर में मोदी का भाषण लगभग 48 मिनट हुआ था। पर, बुंदेलखंड में मोदी लगभग 38 मिनट ही बोले। पर, 10 मिनट कम बोलने के बावजूद कानपुर से ज्यादा कह डाला।

उन्होंने बुंदेलखंड के लोगों को उनके गौरव की याद दिलाई तो यह कहते हुए कि जिस धरती पर इतनी नदियां और इतना पानी हैं, फिर भी यहां की धरती सूखी है।

बुंदेलखंड के लिए घोषित पैकेज को कांग्रेस, सपा और बसपा के नेताओं ने अपनी पॉकेट में भर लिया, उनकी दुखती रग पर भी हाथ रखा।

बुंदेलखंड के लोगों को उनके पराक्रम की याद दिलाते हुए कहा, ‘रानी लक्ष्मीबाई ने नारा दिया था कि मैं अपनी झांसी लेने नहीं दूंगी। आप संकल्प लीजिए और नारा दीजिए, ‘हम बेईमानों को भारत लेने नहीं देंगे।’
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एक बात, कई काम
मोदी ने अपने भाषण से सिर्फ बुंदेलखंड के लोगों में ही कांग्रेस, बसपा और सपा के लिए गुस्सा भरने की कोशिश नहीं की बल्कि उन्होंने यह भी याद रखा कि जहां वह बोल रहे हैं वहां से मध्यप्रदेश की राजनीति भी प्रभावित होती है।

बुंदेलखंड को मिले पैकज का विश्लेषण करते हुए कहा कि  मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दिखा दिया कि धन के सही उपयोग से बुंदेलखंड के दुख कम किए जा सकते हैं।

यह भी जोड़ा कि मध्यप्रदेश की तारीफ वह नहीं कर रहे हैं बल्कि प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाले योजना आयोग ने की है।

यह कहकर मोदी ने साफ कर दिया कि उनके और शिवराज सिंह चौहान के बीच मतभेदों की चर्चाओं में कोई दम नहीं है।

उन्होंने मध्यप्रदेश के लोगों को भी यह संदेश देने की कोशिश की कि यूपी की हालत देखो और सबक लो। भाजपा व शिवराज सिंह को फिर मध्यप्रदेश की सत्ता सौंपो।

अटल की राह, अटल की बात
भगवा चेहरे और हिंदू नेता माने जाने वाले मोदी ने कानपुर में जब अयोध्या के मुद्दे को छुए बगैर विकास और कानून-व्यवस्था पर अपना हमला केंद्रित रखा था तो इसे मोदी के भीतर अटल के अक्स के रूप में देखा गया था।

पर, जब उन्होंने अयोध्या, काशी और मथुरा की धरती उत्तर प्रदेश के झांसी में दूसरी रैली में भी राम, कृष्ण और काशी विश्वनाथ मंदिर का जिक्र किए बगैर अपना भाषण पूरा किया तो यह साफ हो गया कि पीएम इन वेटिंग मोदी अटल की राह ही अपनी मंजिल तय करना चाहते हैं।
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कभी अटल जी ने कांग्रेस के 50 साल बनाम भाजपा को पांच साल का नारा देकर दिल्ली की सत्ता की लड़ाई जीती थी।
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तो आज मोदी ने उसी राह पर आगे बढ़ते हुए ‘60 साल बनाम 60 महीने’ का नारा दे दिया। कहा कि वह 60 महीने में 60 साल की मुसीबतों से निजात दिला देंगे।

कानपुर में कानून-व्यवस्था तो झांसी में भ्रष्टाचार
कानपुर में उनके निशाने पर सपा सरकार और कानून-व्यवस्था रही थी। पर, बुंदेलखंड की धरती पर उनका निशाना कांग्रेस, सपा और बसपा के भ्रष्टाचार पर रहा।

उन्होंने कहा,‘जिन्होंने आपके यहां के लिए मिले पैकेज को पॉकेट में रख लिया। आप उनकी पैकिंग कर दीजिए।’ मोदी यहीं नहीं रुके।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का अहंकारवाद, सपा का परिवारवाद और बसपा का व्यक्तिवाद देश में लूटवाद का काम कर रहा है। इन संकटों की विदाई का संकल्प लीजिए।

शायद यह रैली में आई नौजवानों की भीड़ का ही प्रभाव था कि मोदी ने कहा कि इन संकटों की विदाई बिना नौजवानों को कुछ हासिल होने वाला नहीं।

बुंदेलखंड राज्य पर चुप्पी
बुंदेलखंड में मोदी के भाषण ने साफ कर दिया कि वह बिना सोचे-समझे कुछ नहीं बोलते।

उन्होंने बुंदेलखंड की दुर्दशा याद दिलाते हुए इस वाक्य ‘बुंदेलखंड में दम है लेकिन दिल्ली व लखनऊ में नहीं’ से इस इलाके के लोगों में कांग्रेस, सपा और बसपा के खिलाफ गुस्सा भरने की कोशिश की। पर, अलग बुंदेलखंड के मुद्दे को चालाकी से गोल कर गए।

वह भी तब जब अलग बुंदेलखंड राज्य के नारे चर्चा व लोकप्रियता पाने वाले राजा बुंदेला उनके भाषण से कुछ देर पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे।

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