केंद्र सरकार ने सूबे में मनरेगा के प्रशासनिक मद के 200 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप की जांच कराने का फैसला किया है।
जांच की जिम्मेदारी दिल्ली की एक संस्था ‘समर्पण सोसायटी फॉर सोशल सर्विसेज’ को सौंपी गई है।
संस्था को 10 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट देनी है पर जांच अभी तक शुरू ही नहीं हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, संस्था ने प्रदेश में कर्मचारियों की हड़ताल का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से समय बढ़ाने का आग्रह किया। हालांकि संस्था ने इस बारे में कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया।
कांग्रेस के सदस्य संजय दीक्षित ने केंद्र सरकार को पत्र भेजकर सूबे के 14 जिलों में प्रशासनिक मद में 200 करोड़ रुपये का घपला करने की शिकायत केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से की।
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पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो दीक्षित ने गत 9 सितंबर को फिर पत्र भेजा। इसमें उन्होंने शिकायत के साथ वे सारे रिकॉर्ड भी लगाए जो प्रशासनिक मद में 200 करोड़ रुपये के घोटाले की पुष्टि करते हों।
हरकत में आया केंद्रीय मंत्रालय
दीक्षित की चिट्ठी के बाद हरकत में आए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसचिव डीके सिंह ने संस्था को पत्र भेजकर जांच का निर्देश दिया।
संस्था से जुड़ी मीनाक्षी काण्डाल को लिखे पत्र में कहा गया है कि वह अपने साथ दो ऐसे लोगों की टीम भी बनाएं जो मनरेगा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के बारे में जानकारी रखते हों।
यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि संबंधित जिले में केंद्र की किसी अन्य योजना में कोई गड़बड़ी तो नहीं की गई है।
गाइडलाइन का कहां-कहां उल्लंघन किया गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने संस्था से 10 दिसंबर तक पूरी रिपोर्ट मांगी थी। पर अभी जांच शुरू ही नहीं हो पाई है।
जिन जिलो में होनी है जांच
इलाहाबाद, वाराणसी, सोनभद्र, आजमगढ़, बस्ती, गोंडा, बलरामपुर, सहारनपुर, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, बलिया, कानपुर नगर, व गाजीपुर।
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