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यूपी चुनाव 2022: सुरक्षित सीटों पर मायावती प्रयोग करेंगी दलित-ब्राह्मण फॉर्मूला, विधानसभा अध्यक्षों को दिए निर्देश

Wed, 24 Nov 2021 11:24 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

बसपा सुप्रीमो मायावती ने 2022 का चुनाव 2007 के विधानसभा चुनाव की तरह ही लड़ने का निर्णय लिया है। इस संबंध में सभी विधानसभा अध्यक्षों को निर्देश दे दिए गए हैं।
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बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश की सभी 86 सुरक्षित सीटों पर दलित-ब्राह्मण फॉर्मूला लागू करने की योजना बनाई है। इस बाबत मंगलवार को बैठक में पार्टी के विधानसभा अध्यक्षों को जरूरी निर्देश दिए। वहीं, इन सीटों पर ब्राह्मणों को जोड़ने का कार्य महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा को सौंपा गया है। उन्हें लगातार समीक्षा करने और नया समीकरण तैयार करने निर्देश दिए गए हैं।

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मायावती ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि इस बार बसपा वर्ष 2007 के अंदाज में ही चुनाव लड़ेगी। उन्होंने बताया कि 9 अक्तूबर को पार्टी पदाधिकारियों को सभी विधानसभा क्षेत्रों में बूथ कमेटियां तैयार करने को कहा गया था। मंगलवार को सभी 86 सुरक्षित सीटों (84 एससी और दो एसटी) के विधानसभा अध्यक्षों को बुलाकर उन्हें चुनावी तैयारियों के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा भी कुछ सीटों पर अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को लड़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारियों को उसी तरह से तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं, जिस तरह वर्ष 2007 में की थी।

फोल्डर के जरिए होगा उनके कराए कामों का प्रचार
मायावती ने कहा कि उनके द्वारा कराए गए विकास कार्यों एवं योजनाओं का एक फोल्डर तैयार किया गया है। इसे कार्यकर्ता गांव-गांव तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा कराए गए विकास कार्यों को सपा व भाजपा थोड़ा बहुत बदलकर या आगे बढ़ाकर अपना बताते रहे हैं। ऐसे में लोगों तक वास्तविक जानकारी पहुंचाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कृषि कानूनों की वापसी पर कहा कि केंद्र सरकार को अब यह मामला ज्यादा नहीं लटकाना चाहिए। किसानों की जो जायज मांगें हैं, उनको मान लेना चाहिए। जिससे किसान खुशी-खुशी अपने घर लौट सकें।

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भाजपा और कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कांग्रेस का नारा था, गरीबी हटाओ। भाजपा ने कहा कि कालाधन वापस लाएंगे, सबको 15-15 लाख रुपये देंगे और किसानों की आय दोगुनी करेेंगे। ऐसे सभी नारे खोखले थे। क्योंकि ये कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं। मगर बसपा इनकी तरह कथनी करनी में अंतर नहीं रखती है। इसलिए बसपा अपना घोषणापत्र जारी नहीं करती है बल्कि धरातल पर काम करती है।
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