बसपा प्रमुख मायावती ने कहा है कि बहुजन समाज पार्टी के प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी एवं सम्मेलनों की सफलता से भाजपा सरकार बौखला गई है और अब इन सम्मेलनों पर नई नई पाबंदियां लगाई जा रही हैं। हैरत की बात यह है कि भाजपा नेताओं पर नियमों की कोई पाबंदी नहीं है और उन्हें सभी नियमों की धज्जियां उड़ाने की पूरी छूट है।
बुधवार को लखनऊ में पत्रकारों को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि बसपा ने इन सम्मेलनों का आयोजन खास तौर पर ब्राह्मणों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अयोध्या से शुरू किया है। इन कार्यक्रमों को अब तक अच्छी खासी सफलता मिली है। चारों तरफ इन कार्यक्रमों की चर्चा है।
इनमें प्रबुद्घ वर्ग की जबरदस्त भागीदारी देखकर भाजपा ने इसे खतरे की घंटी मान लिया है। यह इसलिए भी प्रतीत हो रहा है क्योंकि भाजपा ने इन कार्यक्रमों के विरुद्घ अब सरकारी मशीनरी का खुलकर दुरुपयोग करना शुरू कर दिया है। उसकी स्थिति खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे जैसी हो गई है ।
सभी सम्मेलन सरकारी अनुमति के बाद और कोविड-19 के नियमों के पालन के साथ हो रहे हैं । बावजूद इसके सरकार उन्हें नई पाबंदियों में बांधना शुरू कर दिया है। कुछ जगह शिकायतें मिली है कि प्रशासन वहां कह रहा है कि ज्यादा लोग शामिल नहीं होंगे। केवल राजनीतिक एवं जातिगत द्वेष के कारण ऐसा किया जा रहा है। कासगंज में हुए सम्मेलन के बाद बसपा पदाधिकारी और सदस्यों पर जबरदस्ती केस दर्ज कर दिया गया ताकि उन्हें डराया जा सके । दबाव बनाया जा सके। इससे लोगों में बीजेपी के प्रति और गुस्सा बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि केवल ब्राह्मण समाज ही नहीं बल्कि पूरा देश यह देख रहा है कि भाजपा के नेताओं पर कोई पाबंदी नहीं है और वह कहीं भी खुलकर कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सम्मेलन कर लेते हैं। उन पर कोई नियम नहीं लगाया जाता । उन्हें हर तरह के कार्यक्रमों में छूट है। जनता यह बर्दाश्त नहीं करेगी।