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विधानसभा चुनाव के बाद मायावती का नया टारगेट

Tue, 03 Dec 2013 11:22 AM IST
महेंद्र तिवारी/लखनऊ
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बसपा सुप्रीमो मायावती चार राज्यों के विधानसभा चुनावों से फुरसत पाने के बाद मिशन लोकसभा पर ध्यान केंद्रित करने जा रही हैं।
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डा. अंबेडकर की पुण्य तिथि से ही वह इस मिशन पर सक्रिय नजर आएंगी।

राजधानी लखनऊ में इस मौके पर कार्यकर्ताओं की बड़ी जुटान के साथ ही सभी जोनल कोआर्डिनेटरों की बैठक बुलाई गई है। दोनों ही मौकों पर मायावती की उपस्थिति तय मानी जा रही है।

बसपा अध्यक्ष मायावती पिछले काफी समय से राष्ट्रीय महासचिवों सतीश चंद्र मिश्र, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, स्वामी प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर व वरिष्ठ नेता लालजी वर्मा के साथ दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में सक्रिय रहीं।
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इस दौरान सूबे में लोकसभा चुनाव की तैयारी पूरी तरह से जोनल कोआर्डिनेटरों के कंधे पर रही।

मायावती ने बीच में कुछ दिनों के लिए राजधानी आकर लोकसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा भी लिया लेकिन उनका फोकस विधानसभा चुनाव वाले राज्यों पर ही रहा।

अब जबकि विधानसभा चुनाव के प्रचार समाप्त हो चुके हैं, मायावती व संगठन के वरिष्ठ नेताओं का फोकस भी बदल गया है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि संसद का संभवत: आखिरी सत्र आहूत होने के साथ ही पार्टी का अब पूरा ध्यान लोकसभा चुनाव पर होगा और सबसे बड़ा राज्य होने के नाते यूपी इसका केंद्र होगा।

पार्टी ने कार्यकर्ताओं में मिशन लोकसभा का उत्साह भरने के लिए डा. अंबेडकर की पुण्य तिथि छह दिसंबर को खास तौर से चुना है।

इस मौके पर राजधानी में डा. अंबेडकर को श्रद्धांजलि देने के लिए सभी विधानसभा क्षेत्रों से पार्टी के प्रमुख कार्यकर्ताओं को लाने का निर्देश दिया गया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार इस कार्यक्रम में बसपा सुप्रीमो मायावती भी रहेंगी। इसके अलावा लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर इसी दिन प्रदेश भर के कोआर्डिनेटरों की बैठक भी बुलाई गई है।

आमतौर पर यह बैठक महीने की दस तारीख को होती है लेकिन मायावती की राजधानी में उपस्थिति की वजह से छह दिसंबर को बैठक बुला ली गई है।

बैठक में एक-एक लोकसभा क्षेत्र की अब तक हुई तैयारियों की समीक्षा होगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी।

तेजी से बदले हैं समीकरण
इधर, सियासी गलियारों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में बसपा के दो मौजूदा सांसदों के दूसरे दलों से संपर्क की बात सामने आई है। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पश्चिमी यूपी में दो सांसदों को लेकर माहौल बदला है।
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इसके अलावा जिनके टिकट बदले गए हैं, उनमें से कई के मुखर न होने के बावजूद उनकी निष्क्रियता व अंदरखाने नाराजगी भी कोआर्डिनेटरों की चिंता में शामिल हो चुकी है।

एक जोनल कोआर्डिनेटर बताते हैं कि पिछले दिनों जिला संगठनों में शामिल ब्राह्मण समाज के दो-दो उपाध्यक्षों की बैठक बुलाई गई थी।

बदले माहौल में कई जगह नए समीकरण बन गए हैं। आने वाले दिनों में पार्टी की कसरत इन नए समीकरणों को संवारने पर केंद्रित रहने की संभावना है।

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