गाजियाबाद हज हाउस मामले की छानबीन शुरू हो गई है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने सोमवार को इसमें काम कर चुकी सभी निर्माण एजेंसियों को तलब किया। किसने क्या काम किया, इसकी जानकारी ली गई।
बाद में तय किया गया कि सभी निर्माण एजेंसियां लिखित में जवाब देंगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गाजियाबाद हज हाउस को लेकर विभागीय मंत्री आजम खां पिछले दिनों काफी नाराज हो गए थे।
हज हाउस के लिए वित्त विभाग से पैसा रिलीज न होने से गुस्साए आजम ने मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को कड़ा पत्र लिखा था।
इसी के बाद से वित्त विभाग व अल्पसंख्यक विभाग के अधिकारी इस मामले को सुलझाने में लगे हैं।
वित्त विभाग का कहना है कि पहले दिए गए 4.28 करोड़ रुपये का हिसाब मिल जाए तभी नए प्रस्ताव पर पैसा दिया जाएगा।
गाजियाबाद हज हाउस का प्रस्ताव 2005 में ही पास हो गया था। उस समय सरकार ने दो करोड़ रुपये जारी किए थे।
इससे 226 हाजियों के रहने के लिए हज हाउस बनाया जाने लगा लेकिन हज हाउस की जमीन पर विवाद हो गया। बाद में न्यायालय ने स्टे दे दिया था।
इसके बाद मायावती सरकार आई और कोर्ट से केस जीतने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
इस बीच सरकार ने 2.28 करोड़ रुपये और जारी कर दिए। हज हाउस को उत्तर प्रदेश हज समिति ही बनवा रही है।
पिछले साल फिर सपा की सरकार आई तो आजम खां को अपने पुराने प्रोजेक्ट की याद आई। उन्होंने यहां पर एक बड़ा 1886 हाजियों के लिए हज हाउस बनाने का प्रस्ताव बनवा डाला।
नया हज हाउस करीब 42 करोड़ रुपये से बनाया जाना है। इसके लिए वित्त विभाग से पैसा मांगा जा रहा है।
हज हाउस में पहले तीन निर्माण एजेंसियों (आवास विकास, यूपीपीसीएल व सी एंड डीएस) ने काम किया है। लेकिन किसने क्या काम किया है इसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
इसी मुद्दे पर सोमवार को सचिव अल्पसंख्यक कल्याण देवेश चतुर्वेदी ने गाजियाबाद हज हाउस में काम कर चुकी सभी निर्माण एजेंसियों को बुलाया।
इनसे यह जानकारी ली गई कि किसने क्या काम किया है। इनसे यह लिखित में देने को कहा गया है कि किसने क्या और कितने रुपये का काम किया।
निर्माण एजेंसियों से जवाब आने के बाद इनका परीक्षण कर फाइल वित्त विभाग भेजी जाएगी। इसके बाद ही नए हज हाउस के निर्माण के लिए पैसा रिलीज कराने की पैरवी होगी।
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