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खाली करने से पहले बंगले के हर कमरे में मीडिया को ले गईं मायावती, दिखाई कांशीराम से जुड़ी यादें

Sun, 03 Jun 2018 01:02 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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बंगले के अंदर का नजारा दिखातीं मायावती। - फोटो : amar ujala
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अभी तक मायावती के 13 माल एवेन्यू स्थित जिस बंगले में जाना लोगों के लिए संभव नहीं था। शनिवार को उसे खाली करने से पहले वो खुद मीडिया को बंगले के कोने-कोने में ले गईं और बसपा संस्थापक कांशीराम से जुड़ी अपनी यादें साझा की।

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बंगले के अंदर अलग-अलग कमरों में कांशीराम, दलित मूवमेंट से जुड़ी तस्वीरें और खुद मायावती के प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते हुए 'म्यूरल्स' लगे हुए थे। अंदर से ये किसी राजमहल जैसा ही प्रतीत हो रहा था।

मायावती रसोई घर, बैठक कक्ष, प्रतीक्षा कक्ष, विश्राम कक्ष और लाइब्रेरी भी ले गईं। सभी जगह भव्यता की छाप दिखी। बिल्कुल राजमहल जैसा। उन्होंने जगह-जगह खड़े होकर अपनी फोटो खिंचवाई और हर हिस्से से अपनी आत्मीयता दिखाने की कोशिश की। पूर्व मुख्यमंत्री उस सभागार में भी ले गईं जहां दलित महापुरुषों के चित्रों के साथ बसपा मूवमेंट की विस्तार से झांकी सजाई गई है। इसमें कांशीराम के संघर्ष के दिनों की साइकिल से की जा रही यात्रा से लेकर सत्ता तक पहुंचने के छायाचित्र हैं।
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मायावती के खुद के कमरे का नजारा कुछ यूं था कि बेड पर गुलाबी रंग की चादर बिछी हुई थी और पास ही एक सोफा रखा हुआ था। कमरे में लगी लाइट के बगल में ही उनकी एक तस्वीर थी जिसमें उन्होंने गले में नेकलेस, कानों में ईयर रिंग्स पहन रखे थे और उनके बाल भी अन्य महिलाओं की तरह लंबे थे।

मायावती आगे-आगे खुद चल रही थीं और पीछे-पीछे मीडियाकर्मी। उन्होंने बंगले के अंदर जलपान गृह से लेकर कांशीराम विश्राम कक्ष, लाइब्रेरी, मीटिंग हॉल के साथ ही ड्राइंगरूम दिखाए। इसके बाद परिसर के खुले हिस्से में वो मीडियाकर्मियों को उस जगह ले गईं जहां उनकी व कांशीराम की प्रतिमा लगी हुई थीं। पास ही बनी बारादरी में सफेद संगमरमर से बने हाथियों की भव्य मूर्तियां लगी हुई थीं। पास ही बने फौव्वारे में रंग-बिरंगी लाइटें जगमगा रही थीं जो कि माहौल को खूबसूरत बना रही थीं।

दरअसल, ये सारी कवायदें ये साबित करने की भी थीं कि पूरा परिसर कांशीराम यादगार विश्राम स्थल ही है। मायावती ने बंगला खाली करने से पहले प्रेस कांफ्रेंस की और बताया कि बंगले का छोटा सा हिस्सा जिसमें वो रहती थीं उसे उन्होंने खाली कर दिया है।

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खुद को बताया कांशीराम की उत्तराधिकारी

- फोटो : amar ujala
मायावती भवन के प्रांगण में कांशीराम के साथ लगी अपनी आदमकद प्रतिमा भी दिखाने ले गईं। उन्होंने जोर देकर बताया कि वह मान्यवर कांशीराम की वसीयत के आधार पर उनकी घोषित उत्तराधिकारी हैं। इसी परिसर में खड़े दो बैटरी रिक्शे भी दिखाए।

बताया कि यहां आने वालों के लिए घूमने की व्यवस्था है। वह बातचीत में बार-बार यह बताने का प्रयास करती रहीं कि वह एक छोटे से हिस्से में ही रहती थीं और पूरा भवन कांशीराम की स्मृतियों का गवाह है।

अब यह हिस्सा छोड़ने के  बाद कैबिनेट के निर्णय के मुताबिक कांशीराम यादगार स्मृति स्थल में समाहित हो जाएगा।इस भवन के स्वरूप से छेड़छाड़ जैसे सवाल पर वह तल्ख भी हुईं। कहा कि कोई इससे छेड़छाड़ करके दिखाए तो। इससे लाखों गरीबों, दलितों, पिछड़ों की आस्था जुड़ी हुई है। हालांकि उन्होंने इसे तय समयसीमा में खाली कर तमाम सवालों को विराम दे दिया।
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