बसपा सुप्रीमो मायावती कहती आई हैं कि वह दूसरे दलों की तरह चुनाव घोषणापत्र जारी नहीं करतीं। वह कहने में नहीं, करने में यकीन करती हैं। लेकिन, अब उन्होंने भी दूसरे दलों की तरह लुभावने चुनावी वादे करने शुरू कर दिए हैं।
वह घोषणापत्र के जरिये वादे करने की जगह जनसभाओं में घोषणा कर वादे कर रही हैं। इसे दूसरे दलों के लुभावने वादों की काट माना जा रहा है।
बसपा अध्यक्ष ने सपा के लैपटॉप व स्मार्टफोन की जगह नकद आर्थिक सहायता देने का एलान पहले ही किया था।
यह भी कहा था कि सरकार बनी तो बेरोजगारी भत्ता न देकर सरकारी व गैरसरकारी नौकरियां दी जाएंगी। भाजपा ने अपने घोषणापत्र में सूबे में सरकार बनने पर किसानों का फसली ऋण पूरी तरह से माफ करने का वादा किया है। मायावती ने भी अपनी चुनावी सभाओं में किसानों का एक लाख रुपये तक कर्ज माफ करने का वादा किया है।
गरीबों को पट्टा देने का किया वादा
अखिलेश यादव व मायावती
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस समय फल व दूध बांटने की व्यवस्था है तो मायावती ने वादा किया है कि वह सत्ता में आईं तो अंडा, दूध, केक, चना, फल व बिस्किट की व्यवस्था कराएंगी।
भाजपा ने गरीबों को घर देने का वादा किया तो बसपा अध्यक्ष ने कहा कि वह गरीबों को पट्टे देंगी और पूर्व में दिए पट्टों पर जिन्होंने कब्जे किए हैं, उन्हें खाली कराकर सख्त सजा दिलाएंगी।
भाजपा ने पलायन को मुद्दा बनाकर अपने घोषणापत्र में इसे रोकने के लिए पुलिस में एक विशेष विभाग बनाने का वादा किया है। मायावती ने इसकी काट में कहा है कि कांग्रेस शासन में रोटी के लिए, सपा सरकार में सुरक्षा के लिए और भाजपा शासनकाल में नोटबंदी की वजह से पलायन हुआ है, वह इसे रोकेंगी।