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खुलासाः मायावती के कहने पर हुआ रीता के घर बवाल

Fri, 01 Aug 2014 07:39 AM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
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कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के आवास पर आगजनी के मामले की जांच कर रही सीबीसीआईडी ने अपनी जांच में पूरे मामले को राजनैतिक कारणों से रची गई साजिश पाया है।
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जिस समय यह घटना हुई थी, उस समय कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी और तत्कालीन बसपा सरकार की मुख्यमंत्री मायावती में ठनी हुई थी।

कांग्रेस अध्यक्ष ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के एक बयान पर टिप्पणी की थी, जिसे लेकर मामला काफी तूल पकड़ गया था।

हालांकि सीबीसीआईडी ने रिपोर्ट में साजिश की वजह का हवाला नहीं दिया है, लेकिन घटनाक्रम और अधिकारियों व कर्मचारियों तथा बसपा के दो नेताओं और कार्यकर्ताओं के इस घटना में शामिल होने की बात का जिक्र करते हुए पूरे मामले को सुनियोजित साजिश का परिणाम बताया है।

फंस रहे 30 पुलिसकर्मी

रीता बहुगुणा जोशी के आवास पर आगजनी के मामले में 15 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी तो सीधे फंस ही रहे हैं, इनके साथ ही लगभग इतने ही पुलिसकर्मी और फंसेंगे।

ये पुलिसकर्मी कांग्रेस नेता के आवास के कर्मचारियों को अवैध तरीके से हिरासत में रखने और पांच निर्दोषों को गिरफ्तार करने के मामले में फंस रहे हैं।

गृह विभाग के अधिकारी सीबीसीआईडी की ओर से इस मामले की जांच की अंतिम रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। गृह सचिव कमल सक्सेना ने कहा कि 361 पन्ने की इस रिपोर्ट के परीक्षण में अभी कुछ दिन लगेंगे।

इस तरह सच आया सामने

सीबीसीआईडी ने अपनी इस रिपोर्ट में पूरे प्रकरण को सुनियोजित साजिश बताने के साथ ही इसके तार ऊपर तक जुड़े होने की बात कही है।

एजेंसी ने मामले की जांच के दौरान घटनास्थल पर अधिकारियों की मौजूदगी, उनके मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, आवास से बंधक बनाए गए कर्मचारियों के बयान और जेल भेजे गए पांच निर्दोषों के बयान दर्ज किए हैं।

इसके अलावा मौके पर पहुंचे मीडिया कर्मियों व फोटोग्राफरों से जानकारी लेने के साथ ही आरोप के घेरे में आए पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की गई।

पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका तय

सीबीसीआईडी ने अपनी जांच में आरोपी साबित हो रहे पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका का हवाला दिया है। सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों की भूमिका कुछ इस तरह थी:

-तत्कालीन एसएसपी लखनऊ : घटना के समय अपर पुलिस अधीक्षक व अन्य मातहतों से उनकी लगातार बात हो रही थी। जांच एजेंसी का मानना है कि उन्हें इस साजिश की पूरी जानकारी थी और जो हुआ, वह उनकी जानकारी व सहयोग से हुआ।

-तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी हरीश कुमार : साजिश में बसपा नेताओं के साथ समन्वय कर घटनास्थल पर मौजूदगी। घटना के समय इनकी मौजूदगी पास ही पाई गई।

इन अधिकारियों की भी भूमिका

-तत्कालीन क्षेत्राधिकारी हजरतगंज बीएस गर्ब्याल: अपर पुलिस अधीक्षक के साथ ही तत्कालीन क्षेत्राधिकारी हजरतगंज अपने सर्किल के दोनों थानों हुसैनगंज व हजरतगंज से समन्वय बनाए हुए थे। उनकी मौजूदगी में दोनों थानों के पुलिसकर्मी वहां मूकदर्शक बने मौजूद थे।

-हुसैनगंज व हजरतगंज के तत्कालीन इंस्पेक्टर बीआर सरोज व अजीत सिंह: सीबीसीआईडी ने दोनों ही कोतवालियों के तत्कालीन इंस्पेक्टरों की घटना में संलिप्तता होने की बात कही है। इसमें तत्कालीन इंस्पेक्टर हुसैनगंज की सीधी संलिप्तता की बात कही गई है जबकि तत्कालीन इंस्पेक्टर हजरतगंज की भूमिका हल्की बताई गई है।

-एक अन्य वरिष्ठ आईपीएस: इनकी भूमिका भी पाई गई है। हालांकि, जांच एजेंसी उनको सीधा इस मामले से नहीं जोड़ सकी है लेकिन उसने इतना पाया है कि घटना के समय वह भी लखनऊ के पुलिस अफसरों के संपर्क में थे।
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सरकार की मिली भगत

जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में साजिश के तार ऊपर तक जुड़े होने की बात कही है। यह माना जा रहा है कि ऊपर का इशारा मिले बगैर इस तरह की साजिश को अंजाम देना मुमकिन नहीं था। जिला स्तर के अधिकारी भी ऊपर तक की बैकिंग के बगैर ऐसी साजिश का हिस्सा शायद ही बनते।

बसपा नेताओं के खिलाफ आरोप पत्र की तैयारी
जहां सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार से मंजूरी मांगी गई है, वहीं दोनों बसपा नेताओं इंतजार आब्दी व जितेंद्र सिंह बबलू व कार्यकर्ताओं के खिलाफ जांच एजेंसी आरोप पत्र लगाएगी।

हजरतगंज कोतवाली में कांग्रेसी नेता के कर्मचारियों को अवैध हिरासत में रखने के मामले में और हुसैनगंज कोतवाली में निर्दोषों को जेल भेजे जाने के मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक वाद दायर करने के साथ ही विभागीय कार्यवाही भी होनी संभावित है।
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