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तीन तलाक समस्या नहीं, मसले का आखिरी हल है: मौलाना रशादी

Fri, 21 Oct 2016 11:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मौलाना आमिर रशादी - फोटो : amar ujala
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राष्ट्रीय उलमा काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने गुरुवार को कहा कि इस्लाम में तलाक कोई समस्या नहीं है, बल्कि समस्या बढ़ जाने पर उससे निजात का जरिया है। पति-पत्नी के बीच के मसलों का आखिरी हल है।
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राजभवन से बाहर आने पर मौलाना रशादी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार ने सियासी फायदा हासिल करने के लिए तीन तलाक का मामला उठाया है। तलाक किसी भी तरह से दिया जाए, वो मान्य है। शरीयत में किसी भी तरह का बदलाव मुमकिन नहीं है।

इस्लाम में तलाक का प्रावधान समस्या को हल करने के लिए हुआ है। तलाक को कानूनी दर्जा इस्लाम के दूसरे खलीफा हजरत उमर के जमाने में मिला था लेकिन उन्होंने एक साथ तीन तलाक देने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान भी किया था।
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मौलाना ने कहा कि एक साथ तीन तलाक में बदलाव की कोशिशें न हों, बल्कि तीन तलाक देने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान होना चाहिए।

जुमलों की सरकार बनी मोदी सरकार

मौलाना रशादी ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा। बोले, केंद्र की सरकार प्रधानमंत्री के बड़बोलेपन के चलते जुमलों की सरकार बनकर रह गई है। अब तो मोदी पर जोक्स तक बनने लगे हैं।

एक सवाल पर उन्होंने कहा कि टीवी चैनलों की बहस में सभी दल एक-दूसरे को बेईमानी में बड़ा घोषित करते दिख जाएंगे। बेईमानी और भ्रष्टाचार में हर दल भाई-भाई है।

प्रदेश की जनता विकल्प चाहती है। हम उसे राजनैतिक परिवर्तन महासंघ बनाकर विकल्प देने की कोशिश कर रहे हैं।
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चुनावी वादों पर सपा सरकार कर रही झूठा प्रचार

रशादी ने राजभवन जाकर राज्यपाल राम नाईक से मुलाकात की। करीब एक घंटे से ज्यादा चली मुलाकात में मौलाना ने प्रदेश की सपा सरकार पर चुनावी घोषणा पत्र के वादों को पूरा न कर मुसलमानों को धोखा देने और ‘वादे हुए पूरे, अब हैं नये इरादे’ के जरिए झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया। उन्होंने इस संबंध में सरकार को निर्देश देने का राज्यपाल से अनुरोध भी किया।

मौलाना ने राज्यपाल को बताया कि सपा ने 2012 के विधानसभा चुनाव के अपने घोषणा पत्र में अल्पसंख्यक समुदाय से 16 वादे किए थे, जिनमें एक भी पूरा नहीं हुआ। उन्होंने राज्य सूचना आयोग से उर्दू भाषा को हटाने के सपा सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई।

कहा राज्य विधानमंडल ने उर्दू को प्रदेश की दूसरी राजभाषा का दर्जा दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी 4 सितंबर 2014 को अपने निर्णय में इसे संवैधानिक करार दिया था। बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को रिहा करवाने का वादा तो सरकार ने पूरा नहीं किया, उल्टे जो नौजवान कोर्ट से बेकसूर साबित हो गए। सरकार उनके खिलाफ ऊपरी अदालतों में अपील कर रही है। मौलाना ने कहा कि सपा सरकार में महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं।

 उन्होंने भारत सरकार के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक का हवाला देकर बताया कि प्रदेश में बीते चार वर्षों में महिलाओं के खिलाफ घटनाओं में 58 फीसदी का इजाफा हुआ है और 5000 से ज्यादा सांप्रदायिक दंगे भी हो चुके हैं।
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