एक मजदूर की शिकायत पर किडनी रैकेट का भंडाफोड़ करने और मथुरा में प्रदर्शनकारी किसानों से जूझने वाली आईपीएस अफसर मंजिल सैनी अब राजधानी में अपराधों पर लगाम कसेंगी। हर मोर्चे पर बेखौफ और दबंग अंदाज के चलते ‘लेडी सिंघम’ के रूप में चर्चित मंजिल को राजधानी की पहली महिला एसएसपी नियुक्त किया गया है।
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इसे इत्तेफाक कहें या वक्त की जरूरत, जहां-जहां अपराध बेकाबू हुआ, मंजिल सैनी ने मामला संभाला और दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। नई तैनाती पर कहती हैं कि अब उनसे अपेक्षाएं बढ़ गई हैं।
मेरी पहली कोशिश होगी पुलिस की छवि सुधारना ताकि लोग खाकी पर भरोसा कर सकें। मंजिल ने ‘अमर उजाला’ से नए पद की नई चुनौतियां, नई जिम्मेदारी को लेकर उनकी प्राथमिकताएं और अपनी तैयारी साझा की...
सवाल : राजधानी में अपराध नियंत्रण की कमान मिलने को कितना चुनौतीपूर्ण मानती हैं?
जवाब : बहुत बड़ी चुनौती है। प्रोफेशनल के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारी है यह मेरे लिए।
सवाल : पहली बार लखनऊ में एक महिला एसएसपी की नियुक्ति हुई है। इसे किस तरह देखती हैं?
जवाब : यह गौरव का क्षण तो है ही। पर इस नियुक्ति के बाद मुझसे अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। कई मोर्चों पर एक साथ डटना होगा। कोशिश होगी कि अपना 100 फीसदी दे सकूं।
सवाल : लॉ एंड ऑर्डर बड़ी समस्या है, क्या प्राथमिकताएं होंगी?
जवाब : लॉ एंड ऑर्डर तो अहम है ही। मेरी पहली कोशिश यही होगी कि पुलिस की छवि जनता के बीच सकारात्मक बना सकूं। पुलिस पर राजधानी के लोग विश्वास कर सकें। खुले दिल से अपनी बात कह सकें और बेखौफ रह सकें, यही कोशिश रहेगी। इसके अलावा हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई हो, इसपर मेरी नजर होगी।
महिला अधिकारी को किया जाता है अंडरस्टीमेट
मंजिल सैनी
- फोटो : amar ujala
सवाल : वर्दी को कॅरिअर क्यों बनाया?
जवाब : पिता पुलिस सेवा में थे और मुझे इस बात का फख्र है कि मैं उनकी इस परंपरा को अपने तरीके से अंजाम तक पहुंचा सकी।
सवाल : महिला अधिकारी के रूप में क्या फील्ड वर्क में डर नहीं लगा?
जवाब : देखिए, जिस दिन वर्दी पहनी, डर उसी दिन खत्म हो गया था। अपनी इमेज बनानी पड़ती है, इसके लिए निडर बनना होगा।
सवाल : कॅरिअर के अबतक के समय में एक महिला के रूप में किस तरह की दिक्कतें पेश आईं और उनका हल कैसे किया?
जवाब : मेरी पहली पोस्टिंग महोबा में थी। अमूमन एक महिला जब तक खुद को साबित नहीं कर लेती, उसे स्वीकार नहीं किया जाता। महिला अधिकारी को हमेशा अंडर एस्टीमेट करने की कोशिश की जाती है। मुझे भी किया गया, लेकिन काम के प्रति समर्पण और कठिन मेहनत आपकी छवि को निखार देते हैं, ऐसा मेरा मानना है।
सवाल : सूबे में ज्यादातर जिलों की कमान महिलाओं को सौंपी जा रही है। इसे कैसे देखती हैं?
जवाब : व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि महिलाएं अपेक्षाकृत अधिक जिम्मेदारी के साथ अपने काम को अंजाम तक पहुंचाती हैं। महिला सशक्तीकरण को लेकर संवेदनशीलता बढ़ रही है, इसलिए भी महिलाएं वक्त की जरूरत बन गई हैं। महिलाएं प्रोफेशनली बेहतर परिणाम देने में सक्षम हैं।
2008 में एसपी मुरादाबाद रहते एक मजदूर की शिकायत पर किडनी रैकेट पकड़ा। छोटे-छोटे मामले खुले और अंतरराज्यीय गैंग का भंडाफोड़ हुआ। मंजिल बताती हैं कि यह काफी जटिल मामला था। कदम-कदम पर खतरे थे, क्योंकि रैकेट की जड़ें काफी गहरी थीं। बाद में मामला सीबीआई को सौंपा गया था।
2005 के बैच की यूपी काडर की आठ महिला आईपीएस अफसर के बीच एकमात्र महिला, जो एक मां भी थीं। मंजिल बताती हैं कि बिजनेसमैन जसपाल दहल से शादी हुई और मैं मां बनी।
उसके बाद मैंने सिविल सर्विसेज के लिए तैयारी शुरू की। दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से ग्रेजुएट, गोल्ड मेडलिस्ट मंजिल दो बच्चों की मां हैं। पति जसपाल दहल कहते हैं कि उनके इरादे बहुत मजबूत हैं।
उन्होंने अपने कॅरिअर के साथ-साथ घर-परिवार को भी क्वालिटी टाइम दिया है। रिश्ते उनके लिए उतने ही महत्वपूर्ण है, जितना कि उनका प्रोफेशन।
मुजफ्फरनगर कांड को लेकर फिल्म बन रही है मुजफ्फरनगर-2013। इसमें मंजिल सैनी का किरदार भी नजर आएगा। इसे दक्षिण की हीरोइन ऐश्वर्या देवन निभा रही हैं।