लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन केवल मेट्रो का निर्माण और संचालन ही नहीं करेगा।
बल्कि यह ऐसी एजेंसी होगी जो राजधानी के समग्र विकास में योगदान करेगी। एलएमआरसी भविष्य में मेट्रो का स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) होने के साथ ही, अन्य वाहनों का भी संचालन करेगा।
जिसमें बस, टैक्सी, टैंपो और साइकिल रिक्शा भी शामिल हो सकते हैं। 23 किलोमीटर के रूट पर प्रत्येक पांच स्टेशन के बाद फीडर सर्विस का एक बड़ा डिपो बनेगा।
जहां से प्रत्येक स्टेशन के पांच किलोमीटर के दायरे में एलएमआरसी अपनी ओर से फीडर सर्विस देगा। इससे मेट्रो ट्रेन तक पहुंचना लोगों के लिए आसान होगा।
इसके अलावा हाउसिंग और कामर्शियल स्कीम विकसित करने का काम भी कॉरपोरेशन के जिम्मे होगा, जिससे धन अर्जन किया जा सके।
इसी वजह से केंद्र सरकार ने एलएमआरसी का नाम बदलने की सिफारिश की थी, लेकिन मुख्य सचिव ने इससे इन्कार कर दिया।
एसपीवी के गठन में इसका केवल एक ही उद्देश्य नहीं रखा जा सकता। मेट्रो तो इसका पहला काम होगा। लेकिन इसका दूसरा काम होगा अन्य परिवहन सेवाएं देना।
एलएमआरसी जो भी फीडर सर्विस संचालित करेगा, उसमें रोडवेज और सिटी बस सर्विस से मदद नहीं ली जाएगी। यह सेवाएं एलएमआरसी खुद ही संचालित करेगा।
बसों, ऑटो, टैंपो और यहां तक कि रिक्शा चालकों से अनुबंध कर के प्रत्येक स्टेशन के पांच किमी के दायरे में फीडर सर्विस दी जाएगी।
इसका मतलब है कि प्रत्येक पांचवें स्टेशन पर फीडर सर्विस के एक बड़े डिपो की जरूरत पड़ेगी। मेट्रो सेल के अधिकारी बताते हैं कि भारत सरकार तो साइकिल सेवा के संचालन का निर्देश देती है।
मगर कितने प्रतिशत लोग इसमें रुचि प्रदर्शित करेंगे यह एक बड़ा सवाल है। इन फीडर सर्विसेज का डीपीआर बनाने का काम डीएमआरसी को सौंपा गया है। बहुत जल्द ही यह रिपोर्ट भी मिल जाएगी।
मकान, दुकान और माल भी
एलएमआरसी परिवहन साधनों को विकसित करने के साथ ही मकान और दुकान देगा। कुछ बाजार और माल का निर्माण भी करा सकता है।
इसके जरिए अपने कॉरपोरेशन के लिए धन अर्जन करेगा। चक गंजरिया परियोजना से 150 एकड़ भूमि की डिमांड तो मेट्रो सेल ने हाई पावर कमेटी के माध्यम से सरकार से कर ही दी है।
यहां 30 फीसदी कामर्शियल और 70 फीसदी रेजीडेंसियल प्रापर्टी का डवलपमेंट प्राधिकरण करेगा। इसके जरिए करीब एक लाख आवास दिए जा सकेंगे। इसके अलावा मेट्रो स्टेशनों पर बाजार बनाए जाएंगे। इससे भी खासी आर्थिक मदद मिलेगी।