उन्होंने कहा कि किसानों को लेकर घड़ियाली आंसू बहाने वाले यह न भूलें कि प्रदेश की चीनी मिलें उन्हीं के शासन में कौड़ियों में बेंच दी गईं थीं। भट्टा परसौल में जब वे किसानों की जमीन हथियाने के लिए गोलियां चलवा रहीं थीं तब उन्हें किसान नहीं दिखाई पड़ रहे थे। एनआरएचएम घोटाले में भी उन्हें गरीबों की याद नहीं आई। इसी का परिणाम है कि उनके मंत्री और अधिकारी जेलों में है। जिन्होंने लूट के खिलाफ आवाज उठाई उनकी हत्या करा दी गई।