मदरसों को अनुदान देने के लिए अब डीएम छात्र संख्या का सत्यापन नहीं करेंगे। प्रदेश सरकार ने इस नियम को फिर बदल दिया है। अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री मो. आजम खां ने इस पर आपत्ति जताई थी।
अब जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (डीएमओ) का ही सत्यापन माना जाएगा। सरकार ने अनुदान देने के लिए नियम शर्तों में बदलाव का शासनादेश जारी कर दिया है।
प्रदेश सरकार को 146 मदरसों को अनुदान देना है। अनुदान देने की घोषणा खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार बनाने के तत्काल बाद की थी। लेकिन इसमें तब से लगातार अड़ंगे लग रहे हैं।
बहरहाल 146 मदरसों में इस साल 75 को ही सरकार अनुदान देगी। बचे हुए मदरसों को अगले वित्तीय वर्ष में अनुदान दिया जाएगा।
अनुदान देने के लिए जो मानक हैं सरकार उसे भी अब तक कई बार शिथिल कर चुकी है। इसके बावजूद मदरसे मानक पूरे नहीं कर पा रहे हैं। वित्त विभाग ने पहले छात्र संख्या के सत्यापन के लिए छात्रवृत्ति आधार रखा तो इस पर आजम खां ने नाराजगी जताई। बाद में इस नियम को हटाया गया।
सीएम को माननी पड़ी आजम की बात
पिछले दिनों वित्त विभाग ने डीएम की अध्यक्षता में समिति बनाकर छात्र संख्या का सत्यापन करने के लिए कहा। इस पर भी आजम खां सहमत नहीं हुए। सीएम ने भी आजम खां की बात मानते हुए मदरसों का सत्यापन डीएम से कराने के लिए मना कर दिया है।
अब जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ही रिपोर्ट मान्य होगी। मदरसे की जमीन की रजिस्ट्री के मामले में भी सरकार ने कुछ नियमों में ढील दी है।
नए नियमों के अनुसार निदेशक से मांगे गए प्रस्ताव
सरकार ने नियमों में संशोधन के साथ ही निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण को प्रस्ताव फिर से भेजने के निर्देश दिए हैं। पहले चरण में 75 मदरसों को अनुदान देना है। इसलिए सरकार ने तत्काल इसके लिए प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है।
कैबिनेट का फैसला होते ही मिलेगा अनुदान
प्रस्ताव आने के बाद उच्च स्तरीय समिति मदरसों के अनुदान पर मुहर लगाएगी। राज्य समिति से पास होने के बाद इन्हें कैबिनेट में रखा जाएगा। कैबिनेट से पास होने के बाद मदरसों को अनुदान मिल जाएगा।
एक मदरसे के अनुदान में सरकार पर करीब 50 लाख रुपये सालाना का बोझ आएगा। मदरसों में तैनात एक प्रधानाचार्य व 12 शिक्षकों (आलिया के लिए चार, फौकानिया के लिए तीन व तहतानिया के लिए पांच) के साथ ही एक क्लर्क व एक चपरासी का पूरा वेतन सरकार देती है।
मदरसा अनुदानित होने के बाद कई तरह की सुविधाएं व योजनाओं का लाभ भी मिलने लगता है।