लखनऊ और जनकपुरी एसी बस बंद होने की खबर ‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से छपी तो परिवहन निगम एवं परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया। परिवहन विभाग ने 19 नवंबर को परमिट के नवीनीकरण की सूचना क्षेत्रीय कार्यालय को रिमांडर पत्र भेजकर की।
अब परमिट पर दूतावास से काउंटर हस्ताक्षर कराने की प्रक्रिया शुरू हुई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि किसकी लापरवाही से बस सेवा बंद हुई, इसकी अब जांच तक शुरू नहीं हो सकी। गौरतलब है कि छह सितंबर को लखनऊ-जनकपुरी बस के परमिट के नवीनीकरण को मंजूरी दी गई।
लेकिन राज्य परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष के चुनावी ड्यूटी में दूसरे राज्य जाने के कारण बैठक की कार्य वृत्त जारी नहीं हो सकी। जब अध्यक्ष लौटे तो 31 अक्तूबर को परमिट के नवीनीकरण की सूचना क्षेत्रीय कार्यालय को देकर नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिया गया।
जानकारी में यह भी आया कि परमिट की वैधता 10 सितंबर 19 तक थी। इसके नवीनीकरण को प्राधिकरण की बैठक से कुछ दिन पहले आवेदन किया गया था।