लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय अपने न्यू कैंपस में जूट उत्पादन इकाई स्थापित करेगा और स्वदेशी जूट उत्पाद बनाने पर जोर देगा। इसके लिए विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म स्टडीज में मंगलवार को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर जूट आर्टिसंस गिल्ड एसोसिएशन के साथ एक एमओयू किया गया।
यह एमओयू तीन प्रमुख क्षेत्रों को कवर करेगा, जिसमें कौशल वृद्धि, छात्रों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण के साथ उन्हें एक अतिरिक्त आजीविका का अवसर देना शामिल है। इसी क्रम में लविवि द्वितीय परिसर में जूट उत्पादन इकाई स्थापित की जाएगी और स्वदेशी जूट उत्पाद बनाने पर जोर दिया जाएगा। प्रो. आलोक कुमार राय कुलपति ने लविवि की ओर से एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जबकि अंजलि सिंह सचिव जूट आर्टिसंस गिल्ड एसोसिएशन ने संगठन के प्रतिनिधि के रूप में हस्ताक्षर किए। कुलपति प्रो. राय ने बताया कि उक्त के अलावा संयुक्त रूप से दोनों संस्थान जूट पर शोध, इसके वैकल्पिक उपयोग और स्मारिका उद्योग के लिए ब्रांडिंग का भी काम करेंगे। उन्होंने कहा कि यह एमओयू नई शिक्षा नीति को भी गति देगा। क्योंकि इसमें कौशल विकास पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम बड़े पैमाने पर समाज को भी सतत विकास के तहत प्रभावित करेंगे। जूट कारीगर गिल्ड एसोसिएशन अंजलि सिंह द्वारा संचालित है जो एक उद्यमी हैं और लविवि के पर्यटन अध्ययन संस्थान की पूर्व छात्रा भी हैं। इस अवसर पर प्रो. पीयूष भार्गव निदेशक पर्यटन अध्ययन संस्थान, प्रो. पूनम टंडन डीन छात्र कल्याण, डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव समन्वयक पर्यटन अध्ययन संस्थान, डॉ. केया पांडेय, डॉ. राकेश द्विवेदी, शैलेंद्र सिंह और एसएमएच रिजवी मौजूद थे।