आठ से दस हजार रुपये प्रतिग्राम के हिसाब से बेचते थे
राजकुमार उर्फ चीका और राज कुमार ने बताया कि वह लोग नई दिल्ली से मादक पदार्थ लेकर आते हैं और यश श्रीवास्तव व प्रभजीत सिंह इसे जगह-जगह बेचते हैं। विशेष रूप से कोकीन को यश व प्रभजीत लखनऊ के प्रतिष्ठित कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेचते है, जिसमें अच्छा मुनाफा होता है। कोकीन आधे-आधे ग्राम की पुड़िया में बेची जाती है, जिससे स्कूल-कॉलेज के बच्चों पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े और कोई बीमार भी न हो। आरोपियों ने बताया कि वह लोग 8-10 हजार रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से मादक पदार्थ बेचते हैं।
सप्लाई में बाउंसर, वेटर व स्टाफ की मिलीभगत
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गैंग के सदस्य पहले चिह्नित स्थानों पर मिलते है, जिसका एक ड्रेस कोड भी होता है। यह लोग लखनऊ की नाइट क्लब, पब, बार में वहां के बाउंसर, वेटर व अन्य स्टाफ के माध्यम से ड्रग्स सप्लाई करते हैं। चूंकि ऐसी जगह पर बाउंसर, वेटर, स्टाफ की चेकिंग नहीं होती है इसलिए मादक पदार्थ बड़ी आसानी से अंदर चला जाता है।
खरीदारों की अलग लिस्ट
आरोपियों ने बताया कि वह तीन वर्ष से इस धंधे में हैं। उनके पास कस्टमरों की एक लिस्ट भी है, जिनको मेसेज के जरिये बात करके मांग और जरूरत के अनुसार मादक पदार्थ उपलब्ध कराए जाते हैं।
मददगारों को भी चिह्नित किया जा रहा
एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक कुमार ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ हुसैनगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। इस गैंग के लिए शहर में काम करने वाले मददगारों को भी चिह्नित किया जा रहा है। जल्द उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।