शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) हर गरीब बच्चे को कक्षा एक से आठ तक निशुल्क पढ़ाई का अधिकार देता है। हालांकि, राजधानी के निजी स्कूल प्रबंधक उनसे यह हक छीन रहे हैं।
मोहम्मद अली खां ने बताया कि उनके बच्चे को वर्ष 2022 में आरटीई के तहत निशुल्क प्रवेश मिला था। हालांकि, उनसे हर महीने 500 रुपये फीस वसूली जा रही है। इस साल और फीस देने का दबाव बनाया जा रहा है। जब उन्होंने फीस देने से इन्कार किया तो बच्चे का नाम काटने की धमकी दी जा रही है।
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इस संबंध में बीएसए कार्यालय में लिखित शिकायत की है। अमर उजाला में आरटीई को लेकर खबरें प्रकाशित होने के बाद निजी स्कूल प्रबंधकों से परेशान अभिभावक लगातार अपनी शिकायतें लेकर शिक्षा भवन पहुंच रहे हैं। बुधवार को भी दर्जनों शिकायतें सामने आई।
केस-1
आनंद नगर के अनिकेत त्रिपाठी ने शिकायत में बताया कि उनके बच्चे का चयन पहली लॉटरी में निजी विद्यालय में हो गया था। हालांकि, आठ बार दौड़ाने के बाद भी अब तक उनके बच्चे को प्रवेश नहीं मिला है।
केस-2
जानकीपुरम निवासी मोहन साहू ने शिकायत में बताया कि उनके बच्चे यशवर्धन साहू का घर के पास के निजी स्कूल के लिए चयन हुआ था। तीन मार्च को विद्यालय की ओर से दस्तावेज लेकर इंतजार करने के लिए कहा गया। अप्रैल शुरू हो चुका है, पर प्रवेश नहीं लिया गया।