पहली बार सड़क हादसों को भी प्रेडिक्टिव पुलिसिंग में शामिल किया जाएगा। पुलिस हादसों के पैटर्न पर नजर रखेगी और आपात स्थिति के लिए एंबुलेंस और पुलिस वाहन की उपलब्धता के आधार पर तैनाती की जाएगी। इसके अलावा एप उन स्थानों को भी दिखाएगा जहां सड़क पर उत्पीड़न, पीछा करना, उत्पीड़न, धमकाने की शिकायतें और बच्चों के खिलाफ विभिन्न अपराधों की सूचना होगी। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक इसके लिए पुलिस लाइन में कमांड एंड कंट्रोल रूम वाला डाटा सेंटर स्थापित किया जा रहा है।
हर थाने के चार पुलिसकर्मी होंगे प्रशिक्षित
पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के मुताबिक जल्द ही पुलिस कर्मियों को विभिन्न डेटाबेस यूज करने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया जाएगा। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम पुलिस लाइन में आयोजित होगा और हर थाने में तैनात दो से चार पुलिस कर्मियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें मुकदमों का डेटा, आपराधिक रिकॉर्ड डेटा, सोशल मीडिया इनपुट, ऑनलाइन-ऑफलाइन एप्लिकेशन डेटा और सीसीटीएनएस डेटाबेस शामिल है। अपराधों का पता लगाने के लिए पुलिस की कई यूनिट में डेटाबेस पहले ही लागू किया जा चुका है। अब नए तरीके की पुलिसिंग के लिए इसमें नई तकनीकी से जानकारियों को लैस किया जाएगा।