सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के मुताबिक किसी व्यक्ति को फ्लैट आदि देने के लिए अनंतकाल तक प्रतीक्षा नहीं कराई जा सकती है। यदि किसी एग्रीमेंट में फ्लैट/प्लॉट को देने का समय नहीं लिखा है, तब तीन वर्ष के अंदर कब्जा देना होगा।
सीतापुर के अपूर्व सक्सेना ने हापुड़ पिलखुआ विकास प्राधिकरण में एक भूखंड के लिए 1.25 लाख रुपये देकर आवेदन किया था। बाद में प्राधिकरण ने उनसे 3.75 लाख रुपये और जमा करने के लिए कहा, जिसे जमा कर दिया। वर्ष 2009 में कुल 5.05 लाख रुपये जमा करने के बाद आज तक भूखंड नहीं मिला। राज्य उपभोक्ता आयोग के प्रिसाइडिंग जज राजेन्द्र सिंह और सदस्य विकास सक्सेना ने सुनवाई के बाद पीड़ित को विभिन्न मदों को मिलाकर करीब 60 लाख रुपये हर्जाना देना का आदेश दिया है।
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वर्ष 2009 में सीतापुर निवासी अपूर्व सक्सेना पूरी रकम जमा करने के बावजूद भूखंड पाने के लिए भटक रहे हैं। वर्ष 2009 में प्राधिकरण की शर्तों के मुताबिक आखिरी किस्त देने के तीन महीने के अंदर उन्हें भूखंड मिल जाना था। भूखंड न मिलने पर उन्होंने प्राधिकरण से निवेदन किया कि उसे प्लॉट दिया जाये या फिर मार्केट वैल्यू के बराबर धनराशि वापस की जाए। कोई सुनवाई न होने पर राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की।
प्रिसाइडिंग जज राजेन्द्र सिंह ने निर्णय दिया कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के मुताबिक किसी व्यक्ति को फ्लैट आदि देने के लिए अनंतकाल तक प्रतीक्षा नहीं कराई जा सकती है। यदि किसी एग्रीमेंट में फ्लैट/प्लॉट को देने का समय नहीं लिखा है, तब तीन वर्ष के अंदर कब्जा देना होगा। इस मामले में उन्होंने आदेश दिया कि परिवादी को 5.05 लाख रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ 30 दिन में अदा करे। साथ ही साथ मानसिक यंत्रणा, पीड़ा और अवसाद के मद में 10 लाख रुपये 12 प्रतिशत ब्याज के साथ दिनांक 4 जुलाई 2012 से अदा करे। सेवा में कमी और किराये में क्षति के मद में 10 लाख रुपये 4 जुलाई 2012 से 12 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करे।
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आयोग ने यह भी आदेश दिया कि विपक्षी, परिवादी को भूखण्ड के वर्तमान बाजार मूल्य, जिसकी गणना एक लाइसेंसी वेल्युअर से कराई जायेगी, 30 दिन में अदा करे अन्यथा विपक्षी को 28 लाख रुपये वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार अदा करना होगा। यानी क्षतिपूर्ति के रूप में पीड़ित को कुल रकम लगभग 60 लाख रुपये मिलेगी।