पावर कॉर्पोरेशन में आंदोलन के नाम पर ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के बावजूद जूनियर इंजीनियरों (जेई) एवं प्रोन्नत असिस्टेंट इंजीनियरों (एई) के वेतन लेने का मामला सामने आया है। इन अभियंताओं ने 21 एवं 22 सितंबर को पूरे प्रदेश में ड्यूटी नहीं की, लेकिन वेतन पूरा लिया। पावर कॉर्पोरेशन ने अब इन अभियंताओं की संबंधित तिथियों में उपस्थिति का ब्योरा मांगा है। लेकिन इस गड़बड़ी से कॉर्पोरेशन को करीब दो करोड़ रुपये की चपत लगी है।
यह आंदोलन उप्र. राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के आह्वान पर किया गया था। आंदोलन के दौरान जेई एवं प्रोन्नत इंजीनियरों ने सीयूजी मोबाइल बंद रखा था। इससे उपभोक्ताओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था। स्थिति सुधारने के लिए अधिशासी अभियंताओं को आधी रात में खड़े होकर बंद बिजली को चालू कराना पड़ा था।
मगर, अधिकतर अधिशासी अभियंताओं ने ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ के सिद्धांत का उल्लंघन करते हुए गैर हाजिर जेई एवं प्रोन्नत इंजीनियरों का वेतन बना दिया है। प्रबंधन को इस खेल की भनक लगी तो उसने भी गोपनीय तरीके से 21 व 22 सितंबर की जेई एवं प्रोन्नत इंजीनियरों की उपस्थित तलब की है। इससे गैर हाजिर जेई व प्रोन्नत इंजीनियरों और वेतन स्वीकृत करने वाले अभियंताओं में खलबली मची है। यहीं नहीं वर्तमान में शक्ति भवन पर बेमियादी क्रमिक अनशन चल रहा, जिसमें भी गैर जनपद से जेई व प्रोन्नत इंजीनियर शिरकत कर रहे हैं।
करीब दो करोड़ की लगी चपत
उप्र. जूनियर इंजीनियर्स संगठन में सदस्यों की कुल संख्या 6 हजार है। इनमें 4500 जेई और 1500 प्रोन्नत सहायक अभियंता हैं। जेई का एक दिन का वेतन औसतन 2000 रुपये व प्रोन्नत इंजीनियर का 2500 रुपये से ज्यादा है। इनमें कई अभियंताओं का एक दिन वेतन 5 हजार तक है। इस तरह अनुपस्थित रहने के बावजूद वेतन लेने से कॉर्पोरेशन को करीब दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
वेतन मांगा नहीं
उप्र. जूनियर इंजीनियर्स संगठन के केंद्रीय महासचिव जय प्रकाश ने बताया कि अधिशासी अभियंता के द्वारा 21 एवं 22 सितंबर के क्रमिक अनशन की अवधि का वेतन बना दिया था। मगर, मैंने इस अवधि का वेतन मांगा नहीं था। वैसे भी जब तक कार्य बहिष्कार हो, तब तक वेतन काटने का आदेश नहीं होता।
वेतन लिया तो काट दें
उप्र. जूनियर इंजीनियर्स संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष जीवी पटेल ने कहा कि उनके जिन सदस्यों ने गैर हाजिर होने के बाद भी वेतन लिया है तो प्रबंधन काट दे। मगर, अब अन्याय और जलालत स्वीकार नहीं की जाएगी। संगठन ने एलान किया है कि संसाधन नहीं तो काम नहीं, जेई से प्रोन्नत एई 4800 रुपये का वेतनमान स्वीकार नहीं किया जाएगा।
होगी रिकवरी
मुख्य अभियंताओं से 21 व 22 सितंबर को जेई व प्रोन्नत असिस्टेंट इंजीनियरों की उपस्थित मांगी गई है। गैर हाजिर जेई व प्रोन्नत इंजीनियर का वेतन बना दिया गया है तो उनसे रिकवरी होगी।
- प्रदीप कक्कड़, निदेशक (कार्मिक) मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लखनऊ