अपना दल की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने भाजपा नेतृत्व के सामने कम से कम पांच सीटों पर दावेदारी पेश की है । इनमें से मिर्जापुर से खुद अनुप्रिया सांसद हैं। इसके अलावा प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर, फतेहपुर और जालौन सीट की भी मांग की गई है।
लोकसभा चुनाव को लेकर एनडीए की बैठक होने के बाद अब सहयोगी दलों में सीटों को लेकर मंथन शुरू हो गया है । सुभासपा और निषाद पार्टी के साथ ही अपना दल (एस) भी अपने लिए सीटों का चयन करने में जुट गया है। किसके कोटे में कितनी सीटें जाएंगी, यह तो अभी तय नहीं है। पर सभी सहयोगी दल अपने लिए उपयुक्त सीटों की तलाश की शुरू कर दी है। जहां तक अपना दल (एस) की बात है तो वह पिछली बार की तुलना में जहां इस बार अधिक सीट चाहता है, वहीं 2019 में मिली सोनभद्र सीट को भी बदलना चाहता है।
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सूत्रों का कहना है कि 18 जुलाई को दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठक पार्टी की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने सीटों को लेकर अपनी दावेदारी कर दी है, लेकिन अभी तक उसपर फैसला नहीं हुआ है । सूत्रों की माने तो अनुप्रिया ने भाजपा नेताओं से यह भी अनुरोध किया है कि इस बार लोकसभा चुनाव में सीटें तय करते हुए उनके दल के विधायकों की संख्या बल का भी ध्यान रखा जाए। यानि दूसरे सहयोगी दलों से उन्हें अधिक सीट मिलनी चाहिए । उनके प्रस्ताव पर भाजपा ने हामी भी भरी है, लेकिन अपना दल को कितनी सीटें मिलेंगी, यह बाद में साफ होगा ।
उधर सूत्रों का कहना है कि अपना दल इस बार सोनभद्र सीट भी बदलना चाहता है। 2019 में यह सीट अपना दल के कोटे में दी गई थी और इस पर पकौड़ी लाल कोल सांसद हैं । अगर ऐसा हुआ तो कोल चुनाव मैदान से बाहर हो जाएंगे। पार्टी नेतृत्व सोनभद्र के स्थान पर बुंदेलखंड की कोई कुर्मी बहुल सीट लेना चाहता है। वैसे पार्टी की पहली पसंद जालौन है। इसके अलावा पार्टी की दावेदारी प्रतापगढ़ पर भी है। यह सीट 2014 में अपना दल के ही पास थी, लेकिन 2019 में इस सीट को भाजपा ने वापस ले लिया था और इस सीट पर अपना दल के ही विधायक संगमलाल गुप्ता को चुनाव लड़ाया था । इस बार इसी सीट पर फिर से दावेदारी है।
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पांच सीटों पर दावेदारी
सूत्रों के मुताबिक अपना दल की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने भाजपा नेतृत्व के सामने कम से कम पांच सीटों पर दावेदारी पेश की है । इनमें से मिर्जापुर से खुद अनुप्रिया सांसद हैं। इसके अलावा प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर, फतेहपुर और जालौन सीट की भी मांग की गई है। पार्टी का मानना है कि जब 6 व 8 विधायकों वाले दूसरे सहयोगियों को दो से तीन सीटें देने की बात हो रही है तो 13 विधायकों वाले अपना दल को तो कम से कम पांच सीट मिलनी ही चाहिए।