पशुपालन विभाग में पशुओं के लिए दवा एवं अन्य सामग्री की खरीद में हुए घोटाले में पशुपालन विभाग के पूर्व निदेशक डा. इंद्रमणि के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही होगी। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद अपर मुख्य सचिव पशुपालन डा. रजनीश दुबे ने इस बाबत निर्देश जारी कर दिए हैं। प्राविधिक शिक्षा के प्रमुख सचिव एम. देवराज को जांच अधिकारी बनाया गया है।
पशुपालन विभाग में वर्ष 2021-2022 में की हुई दवा खरीद एवं अन्य सामग्री में गड़बडझाला सामने आया था। जांच में सामने आया था कि जुलाई माह तक ही 65 करोड़ में से करीब 50 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए थे। इसमें मास्क आदि ज्यादा दामों पर खरीदे गए। कोल्ड बॉक्स (वैक्सीन कैरियर) के दामों को भी बढ़ी दर पर खरीदा गया। जो कोल्ड बॉक्स जम्मू में 59000 रुपये में, मध्य प्रदेश में 47250 रुपये प्रति पीस की दर पर खरीदे गए थे वे यूपी में 127770 रुपये की दर पर खरीदे गए। एक ही सामग्री को दो बार अलग अलग दरों पर खरीदा गया। दोनों में काफी अंतर रहा। राजधानी इंटरप्राइजेज से वैक्सीन कैरियर की आपूर्ति हुई।
इसके अलावा खरीद जेम पोर्टल के जरिए हुई और भुगतान मैन्युअल किया गया। इस प्रकरण में तीन निदेशकों (रोग नियंत्रक) इंद्रमणि, जिलेदार सिंह, जीवन दत्त एवं अपर निदेशक जेपी वर्मा का नाम सामने आया था। इस मामले में अब निदेशक डा. इंद्रमणि के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे प्रकरण के लिए प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा एम. देवराज को जांच अधिकारी बनाया गया है। इस प्रकरण में केवल अपर निदेशक जेपी वर्मा को चार्जशीट दी गई है। जेपी वर्मा ही अभी तक सेवा में हैं। बाकी सभी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। डा. इंद्रमणि पर भी अब कार्रवाई करने की बात की गई।