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मेट्रो को मिला स्पीड सर्टिफिकेट, जानें कितनी होगी स्पीड

Wed, 15 Feb 2017 02:24 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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लखनऊ मेट्रो - फोटो : amar ujala
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मेट्रो मंगलवार को अब तक की अपनी सबसे अधिक रफ्तार 60 किमी प्रतिघंटा से ट्रांसपोर्टनगर से मवैया के बीच दौड़ी। आरडीएसओ से स्पीड सर्टिफिकेट मिलने के बाद मेट्रो ट्रेन को आने वाले दिनों में अधिकतम 90 किमी. प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाया जा सकेगा।
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अभी तक 30 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से ही मेट्रो का ट्रायल चल रहा था।  मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि आरडीएसओ की तरफ से यह स्पीड सर्टिफिकेट मिलना कॉमर्शियल रन शुरू होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

कॉमर्शियल रन के लिए दोबारा स्पीड सर्टिफिकेट आरडीएसओ से एलएमआरसी को लेना होगा। आरडीएसओ के फरवरी के अंतिम सप्ताह में ट्रायल शुरू कराए जाने की संभावना के चलते कॉमर्शियल रन में देरी की आशंका भलेे ही पैदा हो गई हो।
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वहीं एलएमआरसी के अधिकारी अब भी दावा कर रहे हैं कि आरडीएसओ ट्रायल और सीआरएस जांच दोनों 26 मार्च से पहले पूरी हो जाएंगीं। मेट्रो का कॉमर्शियल रन 26 मार्च से ही शुरू होगा। 
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मुख्य सचिव देखेंगे प्रेजेंटेशन, फिर बनेगी डीपीआर

लखनऊ मेट्रो - फोटो : amar ujala
एलएमआरसी दूसरे और तीसरे चरण के मेट्रो निर्माण के लिए डीपीआर बनवाने की तैयारी में है। इसके लिए पहले मुख्य सचिव की अनुमति जरूरी है। ऐसे में एलएमआरसी ने मुख्य सचिव के आगे दोनों चरण की मेट्रो में शामिल छह नए कॉरिडोर और इनकी कार्य योजना के प्रेजेंटेशन के लिए समय मांगा गया है। 
एलएमआरसी के अधिकारियों का कहना है कि तीन फरवरी को कार्यदायी संस्था दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) कमिश्नर भुवनेश कुमार के यहां प्रेजेंटेशन दे चुका है।

इसमें सभी विभागों की सहमति मिल चुकी है। इसके बाद अब फिजिबिलिटी स्टडी की रिपोर्ट पर मुख्य सचिव से अनुमति मिलनी है। प्रेजेंटेशन में मुख्य सचिव की सहमति एलएमआरसी और डीएमआरसी के अधिकारी लेंगे।

इसके बाद फिजिबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर पहले चार कॉरिडोर के लिए एलएमआरसी टेंडर प्रक्रिया कर अगले तीन-चार महीने में दूसरे चरण की डीपीआर बनवाएगा। छह नए कॉरिडोर की फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने के लिए डीएमआरसी को 2.8 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसका 30 प्रतिशत डीएमआरसी को दिया जा चुका चुका है। 
 
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