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देश को चाहिए ऐसे अफसर: निरीक्षण में बोले, सामने दूर करो बदइंतजामी तभी जाऊंगा

Tue, 13 Sep 2016 06:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अस्पतालों का न‌िरीक्षण - फोटो : amar ujala
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अस्पताल बदइंतजामियों से जूझ रहे हैं। मरीज परेशान होते हैं। तीमारदार इलाज के साथ बीमारियां ले जाते हैं। सोमवार को इस नजारे में कुछ बदलाव दिखा। आला अफसर अस्पतालों में पहुंचे। 
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प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा बलरामपुर अस्पताल पहुंचे तो उन्हें हर तरफ बदइंतजामियां मिलीं। इमरजेंसी में गंदगी। एसी खराब...और दुर्गंध। वे पांच घंटे रुके और बोले-मेरे सामने सभी समस्याएं दूर करो, तभी जाऊंगा। 

सख्त रुख देखा तो अस्पताल प्रशासन भी जुट गया। फौरन सफाई शुरू हो गई। बलरामपुर ही नहीं लोहिया, डफरिन, झलकारीबाई, डफरिन और रानी लक्ष्मीबाई में भी अफसर पहुंचे। हर जगह अफरा-तफरी मची रही। कहां क्या हालात रहे और अफसरों ने क्या देखा, पेश है रिपोर्ट....
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पानी की टंकी चेक करने चढ़े छत पर

अस्पतालों का न‌िरीक्षण - फोटो : amar ujala
प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा के इमरजेंसी में पहुंचने की सूचना पर प्रशासनिक अफसरों और डॉक्टरों में खलबली मच गई। यहां गंदगी मिलती है। 

दवाओं की अलमारी खुलवाई तो उसमें जंग और जाले मिले। वे इमरजेंसी ब्लॉक की छत पर चढ़ गए। वहां रखी पानी की टंकी चेक की। महिला, मेडिसिन और बाल रोग वार्ड गए तो वहां भी बदइंतजामी मिली। सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के वार्ड नंबर 104 में मच्छरों को मंडराते देख प्रमुख सचिव का पारा चढ़ गया। 

उन्होंने कहा-अस्पताल में निदेशक, सीएमएस और एमएस के होने के बावजूद व्यवस्था बेपटरी है आखिर इसे क्या समझा जाए? साफ सफाई और कर्मचारियों के वेतन पर मोटी रकम खर्च हो रही है, फिर यह हालत क्यों हैं? फार्मेसी के मेन स्टोर में दवाओं का रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए कहा। यहां इंटेंट भेजने के बावजूद दवाएं नहीं आई थीं। 

ये वार्ड है या कूड़ाघर..

अस्पताल का न‌िरीक्षण - फोटो : amar ujala
न्यू बिल्डिंग वार्ड की हालत देखकर प्रमुख सचिव ने कहा कि यह वार्ड है या कूड़ाघर। खिड़कियां टूटी, दीवारों में सीलन, टॉयलेट में गंदगी और पानी जमा होने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की।

प्रमुख सचिव और यूपीएचएसडीपी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. हर्ष शर्मा किचन में पहुंचे तो वहां जाला लगा मिला तो वे गुस्सा हो उठे। डॉ. हर्ष ने पूछा दाल में तड़का क्यों नहीं है? इसपर किचन के प्रभारी ने कोई जवाब नहीं दिया। 

इसके बाद प्रमुख सचिव निदेशक डॉ. ईयू सिद्दीकी के कमरे में बैठ गए। करीब दो बजे उन्होंने दोबारा निरीक्षण किया और संतोषजनक साफ सफाई मिलने पर वहां से निकले। उन्होंने अस्पताल के  निदेशक, सीएमएस डॉ. राजीव लोचन और एमएस डॉ. बीकेएस चौहान को व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए। 
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इतनी भीड़ में कैसे होता है इलाज?

अस्पताल का न‌िरीक्षण - फोटो : amar ujala
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सचिव हेकाली झिमोमी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल पहुंचते ही वहां अफरा-तफरी मच गई। पर्चा काउंटर पर भीड़ देख उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि इतनी भीड़ में कैसे इलाज होता है?  अफसर बोले-मैडम ये रोज की स्थिति है। 

इसपर उन्होंने कहा कि इस बारे में प्रशासनिक स्तर से क्या किया गया? उन्होंने इमरजेंसी में भर्ती मरीजों का हाल चाल लिया। निर्माण कार्य की वजह से अव्यवस्था देख उन्होंने तत्काल प्रभाव से इसे दूर कराने को कहा। 

इसके बाद उन्होंने निदेशक डॉ. एचएस दानू, सीएमएस डॉ. डीएस नेगी और एमएस डॉ. आशुतोष दुबे के साथ बैठक कर अस्पताल को पेशेंट फ्रेंडली बनाने के निर्देश दिए।

विशेष सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य नीरज कुमार सुबह आठ बजे ही डफरिन अस्पताल पहुंच गए। पता चला कि डॉक्टर तो दूर अधिकारी भी नदारद हैं जबकि मरीजों की लंबी लाइनें लगी हैं। 

15 मिनट बाद अस्पताल की एसआईसी डॉ. सविता भट्ट पहुंचीं। सीएमएस डॉ. सरिता सक्सेना छुट्टी पर थीं। ओपीडी में डॉक्टरों के न होने पर अफसरों ने दलील दी कि अभी राउंड चल रहा है। राउंड के बाद साढ़े आठ बजे ओपीडी शुरू होगी। इस पर विशेष सचिव ने वार्ड और अन्य हिस्सों का दौरा कर व्यवस्थाएं ठीक करने के निर्देश दिए। 
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