नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के बाद बेरहमी से उसे मार डालने वाले सहानुभूति के कतई पात्र नहीं। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस टिप्पणी के साथ दो सजायाफ्ता की सजा को उचित करार दिया। मामला राजधानी के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र से संबंधित है, जिसमें 12 साल की एक नाबालिग बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद नृशंस हत्या करने के मामले में सत्र अदालत ने पुतई (31) को फांसी की सजा और सह अभियुक्त दिलीप को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
दोनों की तरफ से सजा के खिलाफ अदालत में दायर उनकी अलग-अलग अपीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें सुनाई, फांसी व उम्र कैद की सजा पर मुहर लगा दी।
न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी व न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल की खंडपीठ ने यह फैसला पुतई व दिलीप की ओर से दायर अपीलों पर दिया। अदालत ने फैसले में कहा कि बालिका के शरीर पर आए चोटों के निशान से पता चलता है कि किस तरह से दोनों आरोपियों ने दुष्कर्म के बाद निर्दयता से मार दिया।
ऐसे में अपीलकर्ता किसी सहानुभूति के हकदार नहीं हैं। राज्य की तरफ से शासकीय अधिवक्ता विमल कुमार श्रीवास्तव व जयंत सिंह तोमर तथा अपर शासकीय अधिवक्ता चंद्रशेखर पांडेय ने आरोपी पक्ष द्वारा दाखिल अपीलों का विरोध किया।