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अटल के गढ़ में नहीं मिला अपनों को टिकट, दिनेश शर्मा का भी नाम नहीं

Mon, 23 Jan 2017 02:26 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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‌द‌िनेश शर्मा - फोटो : demo pic
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 निष्ठावान व समर्पित कार्यकर्ताओं को टिकट देने का दम भरने वाली भाजपा और उसके नेताओं को अटल बिहारी वाजपेयी के गढ़ लखनऊ में भी उम्मीदवार बनाने लायक अपने लोग नहीं मिले।
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पार्टी ने लखनऊ की नौ सीटों में जिन सात सीटों की घोषणा की है उनमें पांच पर दलबदलुओं को उम्मीदवार बनाया है। अभी सरोजनीनगर और मोहनलालगंज सीट की घोषणा नहीं की गई है।

मोहनलालगंज सीट समझौते में बीएस-4 के अध्यक्ष आरके चौधरी को मिलने की उम्मीद है। सरोजनी नगर सीट पर दूसरे दलों से आए कई दावेदार टिकट मांग रहे हैं। सूची में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात राजधानी के महापौर डॉ. दिनेश शर्मा का नाम न होना है।
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राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह माना जा रहा था कि इस बार डॉ. शर्मा को जरुर चुनाव लड़ाया जाएगा। बीजेपी ने तीन ब्राह्मणों को टिकट दिया है। कांग्रेस छोड़ भगवा खेमे में आईं रीता बहुगुणा जोशी को लखनऊ कैंट, बसपा छोड़कर आए ब्रजेश पाठक को लखनऊ मध्य और बक्शी का तालाब से पूर्व विधायक चंद्रशेखर त्रिवेदी के पुत्र अविनाश त्रिवेदी को प्रत्याशी बनाया गया हैै।

इसके अलावा लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में आए सांसद कौशल किशोर की पत्नी जयदेवी को मलिहाबाद (सु) सीट से टिकट मिला है। बसपा और कांग्रेस में रह चुके डॉ. नीरज बोरा को लखनऊ उत्तर से मैदान में उतारा गया हैै। भाजपा ने लखनऊ की घोषित सात सीटों में तीन ब्राह्मण, एक वैश्य, एक कायस्थ, एक खत्री और एक दलित को उम्मीदवार बनाया है।
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पूर्व व‌िधायकों में सिर्फ एक को ‌‌ट‌िकट

रीता बहुगुणा और डॉ नीरज बोरा - फोटो : amar ujala
पार्टी ने लखनऊ कैंट से तीन बार विधायक रहे सुरेश तिवारी, लखनऊ मध्य से विधायक रहे विद्यासागर गुप्ता को टिकट नहीं दिया है। पूर्व विधायकों में सिर्फ सुरेश श्रीवास्तव ही लखनऊ पश्चिम से टिकट पाने में कामयाब रहे हैं। अलबत्ता लखनऊ पूर्व से मौजूदा विधायक आशुतोष टंडन ‘गोपाल’ को फिर मैदान में उतारा गया है।

2012 के विधानसभा चुनाव में राजधानी में भाजपा की काफी दुर्गति हुई थी। लंबे समय से शहर की पांच की पांचों सीटों पर झंडा फहराने वाली भाजपा से सिर्फ एक सीट पर सिमट कर रह गई थी।

शेष चार सीटों पर सपा केउम्मीदवार जीते थे। पूरे जिले की बात करें तो नौ में से सात सीटों पर सपा ने कब्जा किया था। कैंट सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी जीती थीं।

सिर्फ लखनऊ की पूरब सीट पर भाजपा के कलराज मिश्र जीते थे। बाद में वे सांसद बन गए। उपचुनाव हुए लालजी टंडन के बेटे आशुतोष टंडन ‘गोपाल’ विधायक बने।

लखनऊ कैंट से उम्मीदवार बनाई गईं रीता बहुगुणा जोशी सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवतीनंदन बहुगुणा की बेटी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की बहन है।

भाजपा से पहले वह सपा और कांग्रेस में भी रह चुकी हैं। वह कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। पिछली बार कांग्रेस के टिकट पर कैंट से विधायक बनीं। करीब चार महीने पहले भाजपा में शामिल हुईं।  

लखनऊ उत्तर से उम्मीदवार बने डॉ. नीरज बोरा पेशे से चिकित्सक हैं। डॉ. नीरज पूर्व विधायक और लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे डीपी बोरा के पुत्र हैं। बोरा मूलरूप से समाजवादी थे लेकिन बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। डॉ. नीरज भी कांग्रेस और बसपा में रह चुके हैं। 
 

लखनऊ पश्चिम और मध्य से उम्मीदवार

सुरेश श्रीवास्तव और बृजेश पाठक - फोटो : amar ujala
लखनऊ मध्य से उम्मीदवार बनाए गए ब्रजेश पाठक छात्र नेता रहे हैं, दबंग छवि के माने जाने वाले पाठक बसपा के टिकट पर उन्नाव से सांसद रह चुकेहैं। इसकेअलावा बसपा ने उन्हें राज्यसभा भी भेजा था। पाठक भी करीब चार महीने पहले ही भाजपा में शामिल हुए हैं। 

लखनऊ पश्चिम से उम्मीदवार बनाए गए सुरेश श्रीवास्तव भी मूलरूप से भाजपाई हैं। पेशे से वकील श्रीवास्तव लखनऊ महानगर के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इससे पहले वह तीन बार लखनऊ मध्य से भाजपा से विधायक रह चुके हैं। लखनऊ मध्य का 60 प्रतिशत हिस्सा
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लखनऊ पूरब और बीकेटी से उम्मीदवार

आशुतोष टंडन और अव‌िनाश - फोटो : amar ujala
लखनऊ के पूर्व सांसद लालजी टंडन के पुत्र आशुतोष टंडन इस समय भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। वह लंबे समय से भाजपा में सक्रिय हैं। इसके बावजूद उन्हें चुनाव लड़ने का मौका 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए उपचुनाव में ही मिल सका। 

बक्शी का तालाब से उम्मीदवार अविनाश त्रिवेदी मूलरूप से व्यवसायी हैं। वह किसी पार्टी में सक्रिय नहीं रहे हैं। अलबत्ता उनके बाबा रामपाल त्रिवेदी बक्शी का तालाब सीट से तीन बार कांग्रेस से विधायक रहे। उनकेपिता चंद्रशेखर त्रिवेदी भी बक्शी का तालाब से कांग्रेस से दो बार विधायक रह चुके हैं। 
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