मोहनलालगंज के एक मंदिर में रविवार दोपहर पंचायत ने झगड़ा सुलझाने के लिए आई गर्भवती और उसके पति के बीच तलाक का तुगलकी फरमान सुना दिया। आनन-फानन दस रुपये के स्टांप पेपर पर तलाक कराते हुए दान-दहेज का सामान भी वापस करा दिया।
पंचायत के इस फैसले से परिवारीजन और स्थानीय निवासी हतप्रभ रह गए। विवाहिता के गर्भवती होने का हवाला देते हुए मायकेवालों ने पंचों के हाथ-पैर जोड़े, पर किसी का दिल नहीं पसीजा। अंतत: पंचायत के फैसले के सामने दंपति और उसके परिवारीजनों को झुकना पड़ा। पुलिस ने मामले की जानकारी से इनकार किया है।
मामला सिसेंडी गांव निवासी युवक और पीजीआई के एक गांव की युवती का है। दोनों की शादी तीन साल पहले हुई थी और एक बेटा भी है। पति की पिटाई से परेशान होकर महिला ने मायकेवालों को सूचना दी। लड़की के पिता ने दामाद और समधी से मिलकर बातचीत की।
सुलह-समझौते के बाद दोनों फिर साथ रहने लगे। विवाहिता फिर से गर्भवती हो गई। फिर युवक उसे प्रताड़ित करने लगा। मायके वालों ने सुलह की कोशिश की लेकिन ससुरालवाले नहीं माने। विवाहिता के पिता ने समझौते के लिए पंचायत से गुहार लगाई थी।
रविवार को पंचायत ने दोनों पक्ष को मोहनलालगंज के एक मंदिर बुलाकर बातचीत की। पंचायत ने दंपति और परिवारीजनों से बातचीत के बाद दस रुपये के स्टांप पेपर पर तलाक लिखवाकर दोनों को अलग कर दिया।