एटीएस ने नोएडा में तीन दिन पहले हुए 90 लाख रुपये के लूट का खुलासा किया था तो उसे भी उम्मीद नहीं थी कि उन्होंने एक ऐसे गिरोह के सदस्यों को दबोच लिया है जो जाली नोट उपलब्ध कराने के नाम पर लूट करते हैं। गिरोह का सरगना मुंबई का सूद कारोबारी सचिन है। सौदे के लिए गिरोह बड़े होटलों का प्रयोग करता है और ज्यादातर बैठकेंमुंबई और दिल्ली में होती हैं। इनके निशाने पर देश के बड़े कारोबारी रहते हैं। एटीएस के अधिकारियों ने बताया कि यह गिरोह एक लाख के बदले चार लाख रुपये तक के जाली नोट उपलब्ध कराता था। माइकल उर्फ मोंटी ने बताया कि सौदे से पहले टोकन मनी के रूप में 3 से 10 लाख रुपये लिए जाते थे।
एटीएस के अधिकारियों के मुताबिक, माइकल ने पूछताछ में बताया कि उसने यह काला कारोबार 2019 से शुरू किया। वह मार्च 2019 में अपनी बहन रीना के घर गोयल प्लाजा थाणे गया था। वहां उसकी मुलाकात पोनेक्स जिम में सचिन से हुई। सचिन सूद पर रकम देने का काम करता था। सचिन ने माइकल से कहा कि कुछ लोगों को ब्याज पर रुपये दे दो जिससे काफी फायदा होगा। उसने कहा था कि वह नोटों को चार गुना करने का भी काम करता है। सचिन ने कानपुर के अविनेंद्र मिश्रा और फरवरी 2020 में हरिओम उर्फ साइंटिस्ट निवासी जौनपुर से मुलाकात कराई।
वाराणसी के फल कारोबारी से की थी पहली डील
माइकल ने पुलिस को बताया कि उसने जुलाई 2020 में पहली मीटिंग वाराणसी के फूलपुर पिडंरा निवासी प्रताप सोनकर से कराई थी। प्रताप वाराणसी के बड़े फल कारोबारी हैं। प्रताप से एक करोड़ रुपये लेकर चार करोड़ के जाली नोट देने का सौदा हुआ। प्रताप से तीन लाख की टोकन मनी ली गई। हालांकि यह सौदा नहीं हो सका। बाद में प्रताप सोनकर ने रुपये वापस मांगे। करीब दो महीने बाद उसकी रकम वापस कर दी। इसी साल गिरोह के सदस्य अभिषेक श्रीवास्तव उर्फ लकी निवासी सोरांव प्रयागराज से मुलाकात हुई।
सचिन, हरिओम उर्फ साइनटिस्ट, अविनेंद्र मिश्रा व अभिषेक उर्फ लकी ने मिलकर दिसंबर 2020 में प्रयागराज के कृषि विभाग में प्रोफेसर से रुपये चार गुना करने की बातचीत की गई। यह बैठक वाराणसी के होटल रमाडा में हुई थी। मीटिंग में टोकन मनी के नाम पर प्रोफेसर ने पांच लाख रुपये दिये। जिसमें माईकल को 30 हजार रुपये मिला था। गिरोह ने प्रोफेसर को 80 लाख रुपये लेकर लखनऊ बुलाया। इस गिरोह ने चार गुना रकम देने की बात कही थी। प्रोफेसर जब 80 लाख रुपये लेकर पहुंचे तो उनको झांसा देकर रुपये हड़प लिये। इस मामले में माईकल को 14 लाख रुपये हिस्सा मिला था।
वहीं प्रयागराज के ईंट भट्ठे के मालिक मनोज सिंह से फरवरी में डील की गई। इस काम के लिए मनोज सिंह के साथ मुंबई के सात सितारा होटल जेडब्ल्यू मैरियेट में मीटिंग की गई। जहां मीटिंग पूरी होने के बाद मनोज सिंह से पांच लाख रुपये रखवाए गये। मनोज से एक करोड़ रुपये के बदले में चार करोड़ रुपये जाली नोट देने का झांसा दिया था। लेकिन बाद में मनोज सिंह सिर्फ 35.40 लाख रुपये से अधिक रुपये का इंतजाम नहीं कर सके। इस कारण डील नहीं हुई। टोकन मनी में 40 हजार माईकल ने रखे थे।
सनातन आश्रम के स्वामी विश्वरुपानंद को ठगने की कोशिश
इस गिरोह में माईकल उर्फ मोंटी का एक एजेंट भी है। वाराणसी के रहने वाले शैलेंद्र सिंह माईकल के लिए काम करता था। उसने महाराष्ट्र नासिक के सनातन आश्रम के स्वामी विश्वरुपानंद से भी ठगी करने की कोशिश की। उनको मीटिंग के लिए मुंबई के जेडब्ल्यू मैरियेट में बुलाया गया। जहां एक करोड़ के बदले चार करोड़ देने का वादा किया गया। स्वामी विश्वरूपानंद से टोकन मनी के नाम पर पांच लाख रुपये रखवा लिये थे। लेकिन बाद में लेनदेन की बात बिगड़ गई। वहीं इसी समय वाराणसी के एक प्रोफेसर से भी ठगी की कोशिश की गई।
एटीएस के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि इस गिरोह का एजेंट वाराणसी का दीपक सिंह है। उसने अगस्त 2021 में मुंब्रा देवी इलाके के ज्वेलरी कारोबारी राहुल उर्फ गाडा से दुकान में ही मीटिंग कर टोकन मनी के नाम पर पांच लाख रुपये हासिल कर लिये। उनको भी चार करोड़ देने का लालच दिया था। वहीं दिल्ली के एजेंट रोहित चौरसिया के जरिए सितंबर 2021 में दिल्ली के कारोबारी संजीव से मुलाकात हुई। वहीं आगरा के दीपक उर्फ दीपू के जरिए दिल्ली के रहने वाले डॉक्टर से मीटिंग की। उनसे तीन लाख रुपये टोकन मनी रखवा लिया। लेकिन काम न होने पर रुपये वापस करने पड़े। इसके अलावा दीपक उर्फ दीपू ने राजस्थान के जयपुर के जयंत सिंह उर्फ बन्ने से दिल्ली के होलीडे होटल में बैठक करवाई। जिसमें 6 लाख रुपये टोकन मनी लिया। 19 अक्तूबर को दिल्ली के लीला होटल में चार गुना करने के लिए 30 लाख रुपये लेकर पहुंचे। जहां उनसे लूटपाट कर ली गई। इस काम में माईकल के साथ दीपक उर्फ दीपू, संजीव, रोहित चोरसिया, सचिन, अविनेंद्र मिश्रा, हरिओम उर्फ साइंटिस्ट, सौरभ यादव व विमल उर्फ विधायक साथ थे।
प्रयागराज के बिल्डर से दिल्ली के जेपी रिसॉर्ट में की लूट
एटीएस की पूछताछ में माइकल ने बताया कि प्रयागराज के सोरांव राजकुमार पटेल बिल्डर का काम करते हैं। उनकी कंपनी क्रांतिराज इंफ्राबिल्ड प्रा. लि. है। राजकुमार ने रकम चार गुना करने के लिए इस गिरोह के सचिन, हरिओम, रोहित, अनुज, अभिषेक सिंह, विमल, सौरभ से बातचीत की। इन लोगों से चार करोड़ रुपये की मांग बिल्डर राजकुमार ने की थी। टोकन मनी के रूप में 5 लाख रुपये दिये गए जिसमें माइकल ने 40 हजार रख लिए। राजकुमार को 90 लाख लेकर नोएडा के होटल जेपी रिसॉर्ट्स बुलाया गया। जहां उसे सारे रुपये लूट लिए गए।
इस मामले में माइकल, सचिन के कहने पर शामिल हुआ। राजकुमार पटेल ने यह रकम कंपनी के चार खातों से निकाली थी। वारदात के दो दिन बाद ही एटीएस ने दो साथियाें अभिषेक और सौरभ को दबोच लिया। उनकेपास से लूटी गई रकम का 44.77 लाख रुपये बरामद कर लिया। जबकि बाकी रकम अभिनेंद्र मिश्रा, विमल उर्फ विधायक लेकर भाग निकले। दोनों के पकड़े जाने की जानकारी होने पर माइकल भी मुंबई भागने की फिराक में था।