मायावती सरकार में श्रम मंत्री रहे बादशाह सिंह के खिलाफ लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने राज्यपाल राम नाईक को विशेष रिपोर्ट भेजी है।
बादशाह सिंह के खिलाफ दाखिल की गई शिकायतों की जांच के बाद सरकार को भेजी गई सिफारिशों पर अमल न होने पर लोकायुक्त ने राज्यपाल को विशेष रिपोर्ट भेजकर इस मामले में सरकार से स्पष्टीकरण लेकर उसे विधानमंडल के पटल पर रखवाने का अनुरोध किया है।
अवध पाल सिंह व रामवीर उपाध्याय के बाद बादशाह सिंह तीसरे पूर्व मंत्री हैं जिनके खिलाफ राज्यपाल को विशेष रिपोर्ट भेजी गई है।
जमीन कब्जाने का था आरोप
महोबा जिले की चरखारी तहसील के खरेला निवासी अखिलेश उपाध्याय ने वर्ष 2011 में लोकायुक्त के समक्ष शिकायत दाखिल कर बादशाह सिंह पर सरकारी जमीनों व संपत्तियों पर कब्जे का आरोप लगाया था।
लोकायुक्त ने शिकायतों की जांच करके अक्तूबर 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती को रिपोर्ट भेजकर उनके द्वारा अवैध रूप से कब्जाई गई जमीनों और संपत्तियों को मुक्त कराने, उनसे हर्जाना वसूलने तथा उन्हें किसी संवैधानिक पद पर नियुक्त न करने की भी सिफारिश की थी।
बर्खास्त हुए लोकायुक्त जांच के दौरान
खास बात यह थी कि बादशाह सिंह मायावती सरकार के एकमात्र ऐसे मंत्री थे जिन्हें लोकायुक्त जांच के दौरान ही बर्खास्त कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति मेहरोत्रा ने बताया कि उन्होंने बादशाह सिंह के खिलाफ जो सिफारिशें की थीं, उनमें से केवल उन्हें पद से हटाकर भविष्य में किसी संवैधानिक पद पर तैनात न करने की सिफारिश को छोड़कर किसी पर अमल नहीं हुआ।
जमीनों पर किए गए अवैध कब्जों को खाली कराने, हर्जाना वसूलने समेत अन्य सिफारिशों पर कार्रवाई के बारे में सरकार की ओर से उन्हें कोई सूचना नहीं भेजी गई। इस पर उन्होंने राज्यपाल को विशेष रिपोर्ट भेज दी है।
ये थीं सिफारिशें
आरोप सिद्ध होने के परिणामस्वरूप बादशाह सिंह को पुन: किसी संवैधानिक पद पर तैनात करने पर विचार न किया जाए। नगर पंचायत, खरेला के भवन संख्या 30ब जो गाटा संख्या 3390 पर बना है, उस पर नगर पंचायत द्वारा पुन: कब्जा प्राप्त किया जाए।
खरेला में खलिहान के लिए सुरक्षित भूमि खसरा संख्या 795 1.9910 हेक्टेयर जिस पर डिग्री कॉलेज ने नाजायज तरीके से स्टेडियम के लिए कब्जा किया है, उससे कब्जा हटवाया जाए। साथ ही अपेक्षित हर्जाना लगाया जाए और खलिहान की जमीन ग्रामवासियों के लिए सुरक्षित की जाए।
खरेला के खसरा संख्या 3426 क्षेत्रफल 0.6680 हेक्टेयर (लगभग पांच बीघा) जमीन पर मंदिर की संपत्ति को छोड़कर शेष भूमि पर से बाबू रामेश्वर सिंह इंटर कॉलेज का कब्जा हटवाकर जमीन मुक्त कराई जाए।
वर्ष 2001 में बाबू रामेश्वर सिंह महाविद्यालय से संबंधित अभिलेख दाखिल करके माध्यमिक शिक्षा परिषद से हाईस्कूल की जो मान्यता प्राप्त की गई है, उसके संबंध में सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद के स्तर से कानूनी कार्रवाई की जाए।