आमतौर कुछ लोग मोदी को हटाने के नाम पर मुस्लिमों के एकजुटता की उम्मीद पाले हुए थे लेकिन पुराने शहर में मतदान के रुझान से उनके हाथ मायूसी लगी। यूनिटी कॉलेज में वोट डालकर निकले पेशे ने इंजीनियर अजीम ने कहा, हम अपना सांसद चुने रहे हैं। इसलिए जो पसंद आया उसे वोट दे दिया। ये मत पूछिए किसे दिया लेकिन उसे ही दिया है जो भाजपा को हरा सकता है।
धर्मगुरुओं के जरिये संदेश देने की कोशिश बेअसर
चुनाव के एलान के बाद से ही राजधानी के लगभग 23 फीसदी मुस्लिम वोटरों पर सबकी निगाहें थीं। कांग्रेस व सपा की ओर से प्रत्याशी घोषित करने में की गई देरी से मुस्लिम वोटर कुछ भ्रम में थे। धर्मगुरुओं का रुख भी साफ नहीं था।
अंतिम समय में कांग्रेस व सपा उम्मीदवारों के नाम का एलान हुआ। प्रचार के दौरान कांग्रेस व सपा ही नहीं, भाजपा उम्मीदवार भी मुस्लिम धर्मगुरुओं की चौखट पर हाजिरी लगाने में पीछे नहीं रहे। हालांकि अलग-अलग मुस्लिम धर्मगुरुओं से मिलकर राजनाथ ने मुस्लिम वोटरों के बीच संदेश देने की कोशिश जरूर की।
सोमवार सुबह वोटिंग शुरू होने के बाद मुस्लिम बहुल इलाकों से मिश्रित रुझान सामने आ रहे थे। कहीं मुसलमानों का झुकान सपा तो कहीं कांग्रेस की तरफ होने की जानकारी मिल रही थी। हुसैनाबाद, चौक, शिया कॉलेज, अकबरी गेट, सआदतगंज, काजमैन, दरगाह, कश्मीरी मुहल्ला, बिल्लौचपुरा, सुन्नी कॉलेज, नक्खास, ठाकुरगंज, कैंपवेल रोड के मुसलिम बहुल केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग गई थीं।
दोपहर तक कई बूथों पर 35-45 फीसदी तक वोट पड़ चुके थे। दोपहर में सिलसिला कुछ धीमा पड़ा लेकिन चार बजे के बाद फिर मतदान केंद्र वोटरों से गुलजार नजर आए। मतदान की समाप्ति पर हुसैनाबाद के यूनिटी कॉलेज मतदान केंद्र के कई बूथों पर 60 फीसदी के करीब वोटिंग हुई, जबकि मिश्रित आबादी वाले कालीचरण कॉलेज के बूथों पर 55 फीसदी से ज्यादा वोट पड़ने का दावा किया जा रहा है। इसी तरह अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों के केंद्रों पर भी 55-60 फीसदी वोटिंग का दावा किया जा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो।)
हुसैनाबाद के यूनिटी कॉलेज मतदान केंद्र पर आसिफ हुसैन अपनी पत्नी जरीना के साथ वोट डालकर निकले थे। पूछने पर बोले-चुनाव दिल्ली की सरकार के लिए हो रहा है। दो ही पार्टियां है भाजपा और कांग्रेस। यहां तो कांग्रेस का ही जोर है। सपा को वोट देने से कोई फायदा नजर नहीं आ रहा।
हुसैनाबाद में रहने वाले सनी बाकर अकाउंट की पढ़ाई करके दुबई में नौकरी कर रहे हैं। कहते हैं- कुछ दिन पहले ही आया था, चुनाव तक रुक गया। मैंने तो कांग्रेस को वोट दिया। पहली बार वोट डालने पहुंची रोजी का कहना था कि मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया। हमारा वोट तो उसे है जो मजहबी लड़ाई न कराए। ज्यादा कुरेदने पर बोलीं- कांग्रेस को ही दिया।
बगल में खड़े बीकॉम अंतिम वर्ष के छात्र फैयाज का कहना था कि उन्होंने साइकिल को वोट दिया। हुसैनबाद की हमीदा, रुखसाना व सीमा का कहना था कि महंगाई कम नहीं हुई। महिलाओं की सुरक्षा बड़ा मुद्दा है। इस बार प्रियंका गांधी चुनाव में उतरी हैं। वो पसंद हैं इसलिए कांग्रेस को वोट किया है।
कालीचरण मतदान केंद्र पर सरायमाली खां के एबाद का कहना था कि यहां कांग्रेस व सपा दोनों को वोट जा रहा है। कांग्रेस लोगों की पसंद ज्यादा है। चौपटियां में रहने वाले अहमद ने भी कांग्रेस को वोट देने की बात कही। पूछने पर कि कांग्रेस ही क्यों? बोले- भाजपा से सीधा मोर्चा तो वही ले रही है। शिया कॉलेज मतदान केंद्र पर रिजवाना भाई के साथ वोट डालने आई थीं। अकबरी गेट निवासी रिजवाना का कहना था कि उन्होंने सपा को वोट दिया। गिरधारी सिंह इंटर कालेज अशर्फाबाद मतदान केंद्र पर सलाउद्दीन व हनीफ मोहम्मद मिले।
सलाउद्दीन ने सपा तो हनीफ ने कांग्रेस को वोट देने की बात कही। सलाउद्दीन का यह भी कहना था कि मुसलमान किसी के कहने पर नहीं अपनी समझ से वोट कर रहे हैं। वैसे राजनाथ के बजाय लखनऊ से कोई और भाजपा उम्मीदवार होता तो इस बार मुसलमान उन्हें सबक सिखा देते। राजनाथ की शख्सियत यहां भाजपा को फायदा पहुंचा रही है।
मतदान करने के बाद मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली।
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शिया धर्म गुरु मौलाना सैफ अब्बास का कहना है कि मुसलमानों का वोट भाजपा और गठबंधन व कांग्रेस में बंटा है। अधिकतर मुसलमानों ने गठबंधन को लेकर रुझान दिखाया है, लेकिन भाजपा व कांग्रेस के वोटर ने पूर्व की तरह अपना भरोसा बनाए रखा है।
ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि पिछले चुनाव से सबक ले चुका मुसलमान इस बार फिर एकजुट नहीं हो सका। वोटरों में बिखराव बना रहा। कहीं मुसलमानों ने कांग्रेस तो कहीं गठबंधन को मजबूत करने को लेकर वोट किया है। वहीं अन्य दल के प्रत्याशियों को भी मुसलमानों ने अपना वोट दिया है।