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शीतलखेड़ा झील को पर्यटन स्थल बनाएगा एलडीए, मिलेंगी ये सुविधाएं

Fri, 05 Apr 2019 04:58 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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शीतलखेड़ा झील का हाल - फोटो : amar ujala
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लखनऊ के रायबरेली रोड पर 14 एकड़ में फैली शीतलखेड़ा झील को संरक्षित कर एलडीए पर्यटन स्थल में बदलेगा। इसके साथ जानकीपुरम विस्तार की खरगापुर झील का भी संरक्षण होगा। प्राकृतिक तरीके से यह काम करवाने के लिए प्राधिकरण ने कोलकाता की विशेषज्ञ एजेंसी को सलाहकार चुना है। यह दोनों झीलों का विकास कराएगी।
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मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह ने बताया कि अवस्थापना निधि में दो झीलों के संरक्षण का काम शुरू किया गया है। इसके लिए कोलकाता की एजेंसी को चुना गया है, जो जैविक उपचार विधि से झील या तालाब के पानी को शोधित करती है। इसमें बायो-रेमेडिएशन और फायटो-रेमेडिएशन तकनीक का इस्तेमाल होता है। यह काम चुने जलीय पौधे और धूप की मदद से होता है।

झील किनारे टहल भी सकेंगे
मुख्य अभियंता ने बताया कि लोग झील-तालाब के पास टहल सकें। बच्चे यहां खेल सकें, इसके लिए भी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। हालांकि प्राथमिकता झील को संरक्षित करने और इसका पानी शोधित करने की होगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इस पानी से भूगर्भ जल भी रिचार्ज हो।
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बताया कि शासन से स्वीकृति के बाद एलडीए को ऐसी झीलों की तलाश थी, जो पुराने स्वरूप में बची हों। इसके लिए शीतलखेड़ा और खरगापुर झील को चुना गया। शीतलखेड़ा झील के आसपास एल्डिको के अलावा दूसरे बिल्डरों ने आवासीय कॉलोनियां बसा दी हैं। कुछ लोग झील की जमीन पर भी कब्जा कराने में जुटे हैं। संरक्षण के बाद इसे रोका जा सकेगा।
 
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पायलट प्रोजेक्ट के रूप में काम

झील का हाल - फोटो : amar ujala
चार एकड़ में फैली झील का अधूरा विकास
आवासीय कॉलोनी के बीच गंदगी से पटी जानकीपुरम विस्तार योजना के सेक्टर-3 में चार एकड़ में फैली खरगापुर झील का विकास अधूरा पड़ा है। यहां पूर्व में झील के किनारे पक्का बंधा बनाकर इसे गंदे पानी इकट्ठा होने का माध्यम बना दिया गया है। किसी तरह का प्रतिबंध न होने से यहां कूड़ा भी लगातार गिराया जा रहा है।

मुख्य अभियंता का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इन झीलों को लिया गया है। शहर में दर्जनों ऐसी झील और तालाब हैं जिनके संरक्षण की आवश्यकता है। यह प्रोजेक्ट दो झीलों पर सफ ल रहा तो बाकी झीलों को अगले चरण में लिया जाएगा। शासन से झीलों के संरक्षण पर आने वाले आठ करोड़ रुपये के बजट की मांग अवस्थापना निधि में की गई है।

प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम पर भी होगा काम
मुख्य अभियंता ने बताया कि हर तालाब या झील का एक कैचमेंट एरिया होता है। इसका बारिश का पानी झील या तालाब में पहुंचता है। संरक्षण के काम के वक्त इस प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम को भी दुरुस्त करने की कोशिश की जाएगी। कुछ भाग पर अतिक्रमण भी हो गए हैं। इन्हें भी खाली कराया जाएगा। इससे पूरे साल झीलों में पानी बना रहेगा।
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