लखनऊ के रायबरेली रोड पर 14 एकड़ में फैली शीतलखेड़ा झील को संरक्षित कर एलडीए पर्यटन स्थल में बदलेगा। इसके साथ जानकीपुरम विस्तार की खरगापुर झील का भी संरक्षण होगा। प्राकृतिक तरीके से यह काम करवाने के लिए प्राधिकरण ने कोलकाता की विशेषज्ञ एजेंसी को सलाहकार चुना है। यह दोनों झीलों का विकास कराएगी।
मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह ने बताया कि अवस्थापना निधि में दो झीलों के संरक्षण का काम शुरू किया गया है। इसके लिए कोलकाता की एजेंसी को चुना गया है, जो जैविक उपचार विधि से झील या तालाब के पानी को शोधित करती है। इसमें बायो-रेमेडिएशन और फायटो-रेमेडिएशन तकनीक का इस्तेमाल होता है। यह काम चुने जलीय पौधे और धूप की मदद से होता है।
झील किनारे टहल भी सकेंगे
मुख्य अभियंता ने बताया कि लोग झील-तालाब के पास टहल सकें। बच्चे यहां खेल सकें, इसके लिए भी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। हालांकि प्राथमिकता झील को संरक्षित करने और इसका पानी शोधित करने की होगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इस पानी से भूगर्भ जल भी रिचार्ज हो।
बताया कि शासन से स्वीकृति के बाद एलडीए को ऐसी झीलों की तलाश थी, जो पुराने स्वरूप में बची हों। इसके लिए शीतलखेड़ा और खरगापुर झील को चुना गया। शीतलखेड़ा झील के आसपास एल्डिको के अलावा दूसरे बिल्डरों ने आवासीय कॉलोनियां बसा दी हैं। कुछ लोग झील की जमीन पर भी कब्जा कराने में जुटे हैं। संरक्षण के बाद इसे रोका जा सकेगा।