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जानिए क्यों इतने महंगे हैं लखनऊ विकास प्राधिकरण के फ्लैट

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Lda flats rates why so high
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अतुल भारद्वाज
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लखनऊ। एलडीए के 4200 से अधिक फ्लैट बिना बिके पड़े हैं। इसकी बड़ी वजह इनका महंगा होना है। ये फ्लैट इतने महंगे क्यों हैं, जबकि इन्हें कम कीमत पर बनाना चाहिए था, इसका जवाब वीसी अभिषेक प्रकाश के निर्देश पर हुई विभागीय जांच में सामने आ गया है। बताया गया कि एलडीए के पूर्व अधिकारियों ने प्लिंथ एरिया रेट पर हजारों फ्लैट बना दिए। इससे लागत 20 प्रतिशत से अधिक तक बढ़ गई। अब वीसी ने प्लिंथ एरिया रेट पर निर्माण कराने पर रोक लगा दी है।
अभिषेक प्रकाश के मुताबिक, अभी तक बहुमंजिला अपार्टमेंट प्लिंथ एरिया रेट पर बनाए गए। एलडीए में 10 साल से अधिक समय तक यह व्यवस्था चलती रही। अब इसे रोका जा रहा है। देवपुर पारा में अधूरे निर्माण का सर्वे कराने का आदेश हुआ है। यहां भी प्लिंथ एरिया रेट पर टेंडर हुआ, जिसे खत्म कर दिया गया है। सर्वे रिपोर्ट में बचे काम की डीपीआर तैयार कर ही निर्माण होगा। एलडीए नए अपार्टमेंट का निर्माण भी डीपीआर बनाकर कराएगा। इससे फ्लैट सस्ते में बनेंगे।
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प्लिंथ एरिया रेट और डीपीआर में अंतर
एलडीए इंजीनियरों के मुताबिक, प्लिंथ एरिया रेट का मतलब है कि कुल बिल्डअप एरिया में निर्माण की जिम्मेदारी एक ही कंपनी की होती है। एलडीए को पूरा अपार्टमेंट तैयार चाहिए होता है। ऐसे में प्रति वर्गमीटर का औसत रेट तय कर लिया जाता है। इसमें विस्तृत योजना न बनने से मैटेरियल की गुणवत्ता और दूसरी सुविधाएं सीमित हो जाती हैं। वहीं, डीपीआर में विस्तृत कार्ययोजना बनती है। हर आइटम की दर अलग से तय होती है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और लागत कम करने में मदद मिलती है, लेकिन इसमें इंजीनियर व अधिकारियों की मेहनत बढ़ जाती है। अधिकतर बिल्डर डीपीआर पर ही काम कराते हैं। इससे कीमत कम करने में मदद मिलती है।
70 लाख का फ्लैट 56 में मिल जाता
एलडीए के एक इंजीनियर ने बताया कि प्लिंथ एरिया और डीपीआर का फर्क देखें तो जिस फ्लैट को 70 लाख रुपये में बेचा जाता है, उसकी कीमत 56 लाख रुपये होती। निर्माण के दौरान लगे समय में कई तकनीक बदलीं। इनका व अन्य सुविधाओं का निर्माण में इस्तेमाल हो पाता।
डीपीआर में 35 प्रतिशत तक कम हुई कीमत
मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री आवासों के लिए भी हमने डीपीआर बनाई। इससे हर यूनिट की लागत केवल 4.35 लाख रुपये आई। दूसरे विकास प्राधिकरणों में यह 35 प्रतिशत से अधिक छह लाख रुपये तक पहुंची। इससे इन आवासों पर आए खर्च का भार दूसरी योजनाओं पर पड़ा। वहीं, प्रधानमंत्री आवास की गुणवत्ता भी बेहतर रही। डीपीआर पर निर्माण से डिजाइन से लेकर मैटेरियल तक को बिल्डर कंपनी की जगह एलडीए के इंजीनियर, अधिकारी चुनते रहे। यह सभी तरह के अपार्टमेंट में भी हो सकता है। वहीं, चौंकाने वाली बात यह है कि जिस पीडब्ल्यूडी के शेड्यूल रेट पर एलडीए काम कराता है, उसी पीडब्ल्यूडी में भवनों का निर्माण डीपीआर बनाकर होता है। वहां प्लिंथ एरिया रेट पर काम नहीं कराए जाते।
यहां हुआ प्लिंथ एरिया रेट पर काम
पारिजात अपार्टमेंट, पंचशील अपार्टमेंट, सोपान एंक्लेव, रश्मिलोक, रतनलोक, स्मृति, सृष्टि, सरगम, ऐशबाग हाइट्स, रिवरव्यू योजना, देवपुर पारा समाजवादी आवास सहित लगभग सभी अपार्टमेंट में प्लिंथ एरिया रेट पर निर्माण हुआ। लगभग सभी जगह महंगी कीमतों से फ्लैट बिना बिके पड़े हैं। यहां किन वीसी और मुख्य अभियंता के कार्यकाल में ठेके दिए गए, इसकी जांच सही से हो जाए तो खेल में शामिल कई बड़े नाम सामने आएंगे, जिन्होंने अपनी सुविधा के लिए यह तरीका अपनाया।
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उम्मीद है साल के अंत तक बिक जाएंगे फ्लैट
एलडीए वीसी अभिषेक प्रकाश का कहना है, एलडीए में प्लिंथ एरिया रेट पर काम बंद किया जा रहा है। देवपुर पारा योजना से इसकी शुरुआत कर रहे हैं। इसका फायदा एलडीए व आवंटियों दोनों को होगा। पहले के निर्माण में कीमतें कम रखने से लेकर दूसरे तरीकों से फ्लैट बेचने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि साल के अंत तक सभी फ्लैट बिक जाएंगे।
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